गरीबों को नहीं है लोकतंत्र का कोई फायदा?

देश में लोकसभा चुनाओं की रणभेरी बजते ही जगह चुनावी मौहाल गर्मा गया है। देश के हर वर्ग में वोट को लेकर काफी उत्साह देखने को मिल रहा है….लेकिन समाज के सबसे निचले वर्ग झूग्गी-झोपडियों में रहने वाले वोटरों के लिए इन चुनाओं के क्या मायने है सकते है जिनके पास गणतंत्र भारत के 68 वर्ष बीत जाने के बाद भी बिजली,पानी,सड़क,स्वास्थ्य,शिक्षा, जैसी मूलभूत सुविधाओं तक आभाव है….

चुनाओं का समय नजदीक आते ही ने राजनीतिक दलों के नेता वोट के लिए समाज के सबसे निचल वर्ग के पास जाकर खूब सारे वादे और दावे तो कर जाते है,लेकिन जीतने के बाद इन लोगों को भुला दिया जाता है।झूगियों में रहने वाले लोगों के लिए आधार कार्ड,वोटर कार्ड रासन कार्ड होने तो उपलब्ध करा दिये जाते है,लेकिन जब इनको मूलभूत सुविधाऐ देने की बात होती है,तो इनकी कोई भी सुनवाई नहीं होती है।इन गरीब लोगों का कहना है कि हम सरकारों से बस मूलभूत सुविधाओं की मांग करते करते थक गये है,लेकिन हमारी किसी भी प्रकार की सुनवाई अभी तक नही हो पाई है।जिससे हम लाचार,बेबस और बीमार जिन्दगी जीने को मजबूर है।

भले ही हमारे देश के जनप्रतिनिधि विकास के बडे बडे दावे करते हो लेकिन. लाचार और बेबसी की जिन्दगी जी रहें इन गरीबों को अपने स्थानीय प्रतिनिधि के अलावा यह तक पता नहीं की उनका सबसे बडा जनप्रतिनिधि सांसद होता है,जो उनकी आवाज को देश के सबसे बडी पंचायत में पहंुचा सकतें है। तब सवाल उठता है कि क्या हमारे जनप्रनिधि जनता के प्रति इतने उदासीन है कि जनता इनका नाम तक नहीं जानते…समस्याओं को सुननी की बात तो कोशो दूर की है। वहीं जब इस बारे में स्थानीय जन प्रतिनिधि से सवाल किया जाता है तो वह साफ तौर पर कहते कि क्षेत्र के विधायक यहां पर धनराशि उपलब्ध नहीं करा रहे है क्योंकि उन्होंने उनकी पार्टी को वोट नही दिया था।

रिपोर्ट-भानु प्रकाश नेगी