रेखा धस्माना की लोक संगीत पाठशाला का कमाल, उम्रदराज महिलायें भी सीख रही है लोकसंगीत

यूं तो बोली भाषा और संस्कृति हमारे धरोहर है। लेकिन पलायन के कारण यह बिखरती नजर आ रही थी लेकिन राज्य गठन के बाद अब धीरे धीरे नई व पुरानी पीड़ी अपनी बोली भाषा और संस्कृति की ओर लौटती नजर आ रही है।दर असल पिछले कुछ समय से प्रसिद्व लोकगायिका रेखा धस्माना उनियाल नई पीड़ी से लेकर पुरानी पीड़ी तक को लोक संगीत सीखने का काम कर रही है और पुरानी पीड़ी के उम्रदराज महिलायें भी इसमे खूब रूचि ले रही है। रेखा धस्माना का कहना है कि अब लोग दुबारा से अपनी संस्कृति की ओर लौट रहे है जो एक सुखद अहसास है।