लॉक डाउन ने बढ़ाई जैविक किसानों की मुश्किलें

नॉक डाउन में जैविक सब्जी को हो रहा है भारी नुकसान.

उत्तराखंड को जड़ी बूटियों का प्रदेश भी कहा जाता है यहां की सुंदर प्राकृतिक आबोहवा में उगने वाले बेशकीमती जड़ी बूटियों से प्राण रक्षक दवाइयां बनाई जाती है यहां के सीढ़ी नुमा खेतों में उगाए जाने वाले अन्य वह फूल फल सब्जियां भी इसी औषधि से कम नहीं है यहां की खेती से उगाए जाने वाले अनाज को विशुद्ध रूप से जो परंपरागत होता है तथा खेतों में बिना किसी रासायनिक पदार्थों के इसे उगाया जाता है इसको जैविक अनाज का नाम दिया जाता है।

वर्तमान समय में कोरोना वायरस के संक्रमण के चलते संपूर्ण उत्तराखंड समेत विश्व में लोक डाउन हो रहा है चल रहा है उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में कई स्थानों पर किसानों की खेती व जिसमें फल वह सब्जियां बाजार में बिकने की बिक्री ना होने के कारण खराब होने की कगार पर पहुंच गई है जैविक किसान अब तक अपनी फसलों की फसलों को सीधे ग्राहकों पर थे लेकिन बाजार बंद होने की से जैविक किसान अपनी फसलों को नहीं बेच पा रहे हैं साथ ही जैविक सब्जियां अन्य सब्जियों से 20 फ़ीसदी महंगी है इससे किसानों को ठीक आए हो जाती है लेकिन आजकल लोग डाउन के चलते इनकी कमाई लागत के बराबर भी नहीं हो पा रही है।

उत्तरकाशी में मटर की खेती पूर्ण रूप से तैयार है लेकिन गाड़ी उपलब्ध ना होने के कारण यहां पर भी नहीं हो पा रही है वही देहरादून में तीन जगह पर लगने वाला हाट बाजार भी कोर्णाक संक्रमण के चलते बंद है जिससे स्थानीय सब्जियां नहीं मिल पा रही है वही रुड़की में सब्जियों को गांव में ही बेचना पड़ रहा है चमोली में सब्जियां बाजार तक नहीं पहुंच पा रही है जिसके कारण वह किसानों के घर में ही खराब हो रही है खराब होने वाली सब्जियों में मटर टमाटर हरी प्याज गोभी आदि सब्जियां हैं