लॉक डाउन में अगर आप भी मानसिक रोग के शिकार हो रहे है तो ये खबर आप के लिए बहुत खास है:देखें वीडियो

कोरोना वायरस का संक्रमण देश-विदेश में फैलता जा रहा है। जिसकी वजह से बहुत सारी मानसिक समस्याएं पैदा हो रही है। उनमें पहली समस्या बहुत सारे विचारों का एक साथ आना है और यह नकारात्मक विचार होते हैं जैसे हमारी घर की कोई सामग्री खत्म हो गई तो क्या होगा? सबको संक्रमण फैल गया तो क्या होगा? इस तरह के जो विचार हैं और हमारे दिमाग में लगातार चलते रहते हैं ।

इसकी वजह से घबराहट चिंताएं और एक डर हमारे दिमाग में बना रहता है। दूसरी तरह की बीमारी जिसमें एक ही विचार बार-बार हमारे दिमाग में चलता रहता है इस विचार को इंसान कंट्रोल करना चाहता है लेकिन वह कर नहीं पाता है, ऐसा व्यवहार करने लग जाता है कि वह इस को कंट्रोल कर सके वह बार-बार repeat करता है।

तीसरी प्रकार की जो बीमारी है वहां है पैनिक अटैक्स। इसमें एकदम से बहुत ज्यादा घबराहट होने लगती है इंसान को लगता है कि मैं मरने वाला हूं दिल की धड़कन बढ़ना, हाथ-पांव का अपना पसीना आना सरकार द्वारा चक्कर आना आदि हो जाता है। ऐसे में इंसान हॉस्पिटल की तरफ आता है और उसे लगता है कि मुझे हार्ट अटैक आ रहा है। इसका मुख्य कारण हमारे दिमाग़ में सूचनाओं का ओवरलोड होना है कि सारा दिन हम सूचनाओं को देखते रहते हैं। जिसमें टीवी चैनल्स और सोशल मीडिया शामिल है हमारे घरों में टॉपिक इस टाइम चर्चा का हो चुका है और सिर्फ कोरोनावायरस को लेकर के है इस तरह के जो नकारात्मक विचार दिनभर हमारे दिमाग में चलते रहते हैं ।

उसका यह कारण है इस समस्याओं को दूर करने के लिए इसके लिए हमें डेली की प्लानिंग करनी पड़ेगी। इस प्लानिंग में हम अपने परिवार के साथ समय व्यतीत करें अपने बच्चों से बात कर सकते हैं अच्छा म्यूजिक सुन सकते हैं, ग्रुप डिस्कस कर सकते हैं, किताब पढ़ सकते हैं, इंडोर गेम खेल सकते हैं, अपना शेड्यूल बना कर रखना है, जिसमें हम अपने खाने और सोने का समय निश्चित कर सकते हैं, बच्चों को घरेलू एक्टिविटीज में लगाना चाहिए, और हमें रेगुलर मेडिटेशन करने की अत्यंत आवश्यकता है, वैसे भी मेडिटेशन को अपनी आदतों में रखना जरूरी है मेडिटेशन 20 मिनट सुबह और 20 मिनट शाम को करना आवश्यक है। इससे हमारे दिमाग में आने वाले नकारात्मक विचार पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है और इसको एक खतरे की तरह नहीं एक जंग की तरह लीजिए।

 

जब भी कोई नए मौके आते हैं तो अपने साथ बहुत सारे नए अवसरों को भी लेकर आता है। अगर आपके घर में किसी को भी मानसिक रोग की समस्या आती है और आपको उसे हैंडल करने में भी समस्या आ रही है तो अपने नजदीकी मनोचिकित्सक से संपर्क किया जा सकता है। इसके लिए अपने निकट के दोस्तों से फोन पर भी बात की जा सकती है, जिसका वह कुछ ना कुछ सुझाव देकर आपकी समस्या को सुलझा सकते है।

-डॉक्टर निशा सिंगला,मनो चिकित्सक कोरोनेशन अस्पताल,देहरादून।