लाॅकडाउन में वाहन चालकों की हालत खराब…………

-भानु प्रकाश नेगी,देहरादून


कोरोना वायरस के सक्रमण के भय से सम्पूर्ण विश्व को लाॅक डाउन किया गया है। पूरे देश में पिछले 40 दिन से अधिक के लाॅकडाउन ने अर्थव्यस्था की कमर तोड़ दी है। कारोंबार ठप्प होने से जहां सरकारी खजाना खाली हो गया है। वही लाॅकडाउन का सबसे ज्यादा असर रोजमर्रा की जिन्दगी में कमा कर अपने परिवारों का भरण पोषण करने वालों पर पड़ा है। जिसमें मजदूर,ड्राइबर,आदि है। इन दोनो वर्ग के लोगों का काम विल्कुल ठप्प होने से अब इनके रोटी के भी लाले पड़ गये है। बात अगर पूरे उत्तराखंड में टैक्सी मैक्सी और बस संचालकों की करें तो सबके हालत बहुत खराब हो गये है।

देहरादून में में जहां पचास हजार काॅमशियल वाहनों से ढेड लाख लोग जुडे है। तो चमोली में तीन हजार से ज्यादा वाहन रजिस्ट्रेट है,ऋषिकेश में सयुक्त यात्रा स्टेसन समिति के अधीन नौ परिवहन कम्पनियां रजिस्ट्रेट है.जिसमें 1700 वाहन है ओर पचास प्रतिसत खुद वाहन चालक मालिक है,पौड़ी में 3700 टैक्सी मैक्सी और ट्रक संचालक है,नैनीताल में हल्दवानी से संचालित केएमओयू के दो हजार चालक,परिचालक106 कर्मचारी तो वही उद्यमसिंह नगर 245 निजी बसों पर चलनेवाले 700 चालक समेत टैक्सी,मैक्सी आॅटो,विक्रम से जुडै 7500 लोग वेरोजगार हो गया।पिथौरागढ़ में निजी वाहनों के 25 हजार लोग बेराजगार हो गये है।चम्पावत में 2500 लोग बेरोजगार हो गये है।अल्मोड़ा में 400 वाहन चालक खाली बैठे है।

बागेश्वर में केएमयू की 55 बसें 110चालक परिचालकों को अभी तक मानदेय नहीं मिला।इस तरह से अगर उपरोक्त आंकडों पर नजर डाल दिया जाय तो वाहन चालक ओर मालिकांे पर इस वक्त भारी संकट के बादल छाये हुऐ है।राज्य सरकारों को इनके लिए भी कुछ सकारात्क पहल करने की आवश्यकता है।