बंजर खेतों को आवाद कर लाॅक डाउन का सद्पयोग कर रहे है टिहरी के युवा

भानु प्रकाश नेगी
अनुपम प्राकृतिक सौन्दर्य और शुद्व आवोहवा के लिए देश और दुनियां में विख्यात उत्तराखंड अपने आप में एक अनोखा प्रदेश है। लेकिन यहां कि पर्वतीय जिलों में रोजगार के साधन ना के बराबर होने और विकट भूगोल के कारण रोजगार के साधन ना के बराबर है।जिसके कारण राज्य निर्माण के 19 साल बाद भी पहाड़ों से मैदानी क्षेत्रों के लिए रोजगार के लिए पलायन एक बडी समस्या बनी हुई है।नतीजतन राज्य के कई जिलों में गांव के गांव खाली हो गये है। पलायन के कारण न सिर्फ गांव जनशून्य हो गये है,बल्कि यहां की लोक विरासतें,संस्कृति,लोक परम्परायें,रीति रिवाज,आदि का भी लगातार ह्रास होता जा रहा है।पलायन के कारण यहां का परम्परागत व्यवसाय जैविक खेती को भारी छति पंहुची है।पलायन के कारण खेत बंजर पडे हुऐ है जिनको अब आवाद करना किसी पहाड़ को तोड़ने जैसा है।
लेकिन वर्तमान समय में विश्वव्यापी महामारी कोरोना वायरस की वजह से सम्पूर्ण दुनियां में लॉकडाउन के कारण सभी प्रकार के कारोबार व रोजगार के साधन बंद है।जिसके कारण उत्तराखंड के कुछ युवा लॉकडाउन से पहला अपने गांव लौटे और गांव में काफी दिनों तक आराम फरमाने के बाद ग्राम प्रधान के सानिध्य में गांव के बंजर खेतों को आवाद करने योजना बनाई।
ताजा धटना टिहरी गढ़वाल के जाखणीधार ब्लाक स्थित ग्राम उडोली(रस्वाडी) का है।जिसका कुल क्षेत्रफल 4.6वर्ग किलोमीटर है। यह गांव मुख्य मार्ग से 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। गांव में 20 परिवार शिक्षा व रोजगार की तलास में पलायन कर चुके है।ग्राम प्रधान राम प्रताप के सानिध्य में शहर से गांव लौटे युवाओं ने गांव में बंजर पडे खेतों को आवाद कर खेती करने का मन बनाया है। इन युवाओं में उपेन्द्र,गणेश,मुदित,दुगेश,हरिशंकर,सोहन,आदित्य,सुनील,सेमवाल,आदि सामिल है।
इसमें कुछ युवा ऐसे भी है जो शादी के लिए गांव आऐ थे लेकिन लॉकडाउन के कारण गांव में ही रह गये।लेकिन इन युवाओं ने लॉकडाउन का फायदा उठाते हुऐ फिर से बंजर खेतों को आवाद कर खेती करने का मन बनाया है। जिससे न सिर्फ युवाओं में खेती की ओर मुडकर अपनी परम्परागत खेती अपना कर एक बार फिर से उत्तराखंड को खुशहाल बनाने का सपना संजाया है बल्कि रिवर्स पलायन के लिए भी लोगों को प्रेरित किया है।