नई सोच नई पहल: पुनर्जीवित होंगे गाँवों में कुटीर उद्योग

नई सोच नई पहल: पुनर्जीवित होंगे गाँवों में कुटीर उद्योग

-कुलदीप राणा आज़ाद


रूद्रप्रयाग। जिले के दरम्वाड़ी गाँव निवासी संजय शर्मा दरमोड़ा द्वारा पहाड़ के गांवों से हो रहे पलायन को रोकने के लिए नई सोच नई पहल स्लोगन के तहत कार्य किया जा रहा है। पहाड़ से पलायन कर चुके लोग कैसे रिमाइग्रेशन करें और कैसे यहां के लोग गांवों में ही अपनी आजीविका चलायें इसको लेकर कार्य किया जा रहा है

नई सोच, नई पहल। इस  स्लोगन के बैनर तले ही पहाड़ के गांवों का कायाकल्प करने का संकल्प लिये हैं दिल्ली के कुछ उत्साही युवा। मूल रूप से रूद्रप्रयाग जनपद के दरम्वाड़ी गांव निवासी संजय शर्मा दरमोड़ा द्वारा पहाड़ के गाँवों से हो रहे पलायन को रोकने के लिए गाँव में ही रोजगार के साधन विकसित करने का अभियान चलाया जा रहा है। पेशे से हाई कोर्ट में वकालत करने वाले संजय शर्मा अपनी टीम के साथ पहाड़ के गांवों में पौराणिक पनचक्कीयों, घराटों, रिंगाल की हस्तशिल्प कलाकारी और दस्तकारी को पुर्नजीवित कर छोटे-छोटे कुटीर उद्योगों के रूप में विकसित करने जा रहे हैं जिससे यहां के लोगों की आजीविका गांवों में ही उपलब्ध हो सकें और यहां से पलायन पर अंकुश लग सके। छात्रों की शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए वे विभिन्न विद्यालयों में छात्रों को निःशुल्क पाठ्य सामग्री भी वितरित कर रहे हैं  जबकि गांवो में महिला मंगल दलो, कीर्तन मंडलियों और युवक मंगल दलों को भी अनेकों सामग्री वितरित कर रहे हैं।

नई सोच नई पहल के बैनर तले कार्य कर रही इस टीम की गांवों में भूरी-भूरी प्रसंशा की जा रही है और इससे गांवों में बच्चे हुए लोगों में भी एक उम्मीद जग रही है। ग्रामीणों का कहना है कि पहाड़ में आज भी महिलाएं अधिकतर खेती पर ही निर्भर हैं जबकि महिलाओं का हुनर संगीत, सिलाई-बुनाई आदि कार्यों में भी है लेकिन संसाधनों और उचित मंच न मिलने के कारण उनकी प्रतिभा दब जाती है ऐसे में इस टीम द्वारा महिलाओं को संसाधन उपलब्ध करवाकर उनकी प्रतिभा को आगे बढ़ाने का भी कार्य किया जा रहा है।

उत्तराखण्ड राज्य गठन के 18 वर्ष बीत चुके हैं लेकिन यहां की जल जंगल जमीन से राज्य की आर्थिकी मजबूत करने और गांवों में आजीविका के साधन विकसित कर उन्हें सशक्त बनाने का संकल्प लेने वाले सरकारें आज केवल शराब और खन्नन तक सिमट गई हैं। गांवों में रोजगार के साधन तो विकसित नहीं हो पाये हैं लेकिन सम्पूर्ण पहाड़ भारी मात्रा में पलायन की भट्््टी में जरूर झुलस रहा है। ऐसे में इन उत्साही युवाओं की यह पहल सार्थक होती है तो यह सरकारों और हमारे योजनाकारों के लिए नजीर तो बनेगी ही बल्कि पहाड़ वासियों के लिए वरदार भी साबित होगी। ♦