मात्र 6 दिन में कोरोना राक्षस से जंग जीता 9 महीने का नवजात

 

17 अप्रैल को जब एक महज नौ माह का कोरोना संक्रमित बच्चा दून अस्पताल आया। खबर से हर कोई बैचेन था। डाक्टरों, परिजनों की चिंता बढ़ गई, बड़ी संख्या में लोग डाक्टरों, स्वास्थ्य बीट कवर कर रहे हम जैसे साथियों से बच्चे के स्वास्थ्य के बारे में लगातार पूछते रहे।
बच्चे की मां, जिसकी खुद की कोरोना रिपोर्ट नेगेटिव थी। उसने अपने बच्चे के साथ रहने की डाक्टरों से गुजारिश की। कोरोना की जिम्मेदारी संभाल रहे डिप्टी एमएस डा. एनएस खत्री ने विशेषज्ञ चिकित्सकों से राय मश्विरा किया। तय हुआ मां बच्चे के साथ रहेगी, उसे भी संक्रमित की तरह उपचार किया जाएगा। मां को पीपीई किट, मास्क, ग्लवस पहनाकर रखेंगे। क्योंकि मां का दूध बच्चे की इम्यूनिटी और संक्रमण को रोकने की ताकत देगा। कोरोना नोडल अधिकारी डा. अनुराग अग्रवाल, बाल रोग विशेषज्ञ डा. आयशा इमरान, डा. विशाल की टीम, एएनएस रामेश्वरी नेगी, सिस्टर इंदु शर्मा की अगुवाई में नर्सिंग स्टाफ, जनसंपर्क अधिकारी महेंद्र भंडारी, संदीप राणा समेत अन्य स्टाफ ने जज्बे के साथ दोनों की पूरी देखभाल की। एसटीएफ के दारोगा उमेश कुमार समेत कई ने उनकी मदद की। मां का दूध और डाक्टरों का बेहतर उपचार उसके लिए मुफीद साबित हुआ। सबसे कम समय में बच्चा छह दिन में कोरोना की जंग जीतकर अपनी मां के साथ क्वारंटाइन सेंटर अपने अन्य भाई-बहनों के बीच चला गया। मां की आंखों में खुशी के आंसू और लब पर खुदा, डाक्टरों एवं मेडिकल स्टाफ के लिए शुक्रिया के लफ्ज थे। अस्पताल में ही भर्ती पति के जल्द ठीक होने की दुआ की।

आपसे भी इल्तजा कि कोरोना से डरें नहीं, इसे फोबिया न बनाएं। इम्यूनिटी मजबूत करें। लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर इसे हाराने में सहयोग दें।