अमेरिका नही उत्तराखंड है मंत्री जी !पहले सूअर और बंदरों से निजात दिलाओं,इनकम डब्बल बाद में होगी।

नकलची मंत्री और कामचोर अफसर
– आखिर कितना और कब तक झूठ बोलोगे। घिन आती है सोचकर।
– जागो लोगो, उठो और आओ, क्यों न गैरसैंण बसाएं!
गत दिनों कृषि मंत्री सुबोध उनियाल एक मंच से बोल रहे थे मैं अमेरिका गया था और वहां मैंने खेती के तरीकों को सीखा कि एकीकृत खेती कैसे करें? इसी तर्ज पर हम मैं एक गांव हूं की योजना धरातल पर उतारेंगे। कल पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज बोले, टिहरी झील में मोदी की तर्ज पर उतारेंगे सी-प्लेन। वन मंत्री हरक सिंह बोल रहे हैं अफसर पहाड़ विरोधी हैं।

सीएम त्रिवेंद्र रावत ने दून के लिए कल ही एक हजार करोड़ रुपये की पेयजल योजना की बात करते हैं, बिना यह बात जाने कि पाॅश यमुना कालोनी और विजय पार्क के कई हिस्सों में दो दिन से भी अधिक पेयजल की आपूर्ति नहीं हुई है। आखिर कितना झूठ बोलते हैं ये नेता। नेता झूठे और अफसर कामचोर। राज्य गठन से ही पता नहीं हजारों पर्यटन सर्किट, एक लाख मेगावाट से भी अधिक बिजली उत्पादन की बात, 2 हजार करोड़ से भी अधिक बागवानी की आमदनी और भी न जाने क्या-क्या बातें क्या बोल।

दरअसल, उत्तराखंड का मंत्री व नेता जब सुबह सो कर उठता है तो पूरे दिन क्या झूठ बोलना है, तय कर लेता है। जनता को बड़े-बड़े ख्वाब दिखा कर धरती पर ही स्वर्ग के दर्शन करा देते हैं नेता, और फिर शाम ढले मदिरा के जाम और स्वर्ग की अप्सराओं के साथ नृत्य करते हैं, जनता ठंड में जमीन पर ही कुछ और सिकुड़ जाती है, ठीक उसी तरह जिस तरह अकबर द्वारा ठंडे तालाब में खड़े किये गये व्यक्ति को कि वो तो रात भर महल के जलते चिरागों की गर्मी से ठंडे पानी में खड़े रहा, इसलिए ईनाम का हकदार नहीं है। जनता ऐसे ही ठंड में खड़ी है दूर महल में चिरागों की रोशनी की तपिश ले रही है। जागो-जागो जनता जागो। नेता और अफसर मिलकर तुम्हारी बैंड बजा रहे हैं, उठो और चलो गैरसैंण, वहीं तुम्हारा भला होगा।