खतरे में हिन्दी !

दून स्कूल के पाठ्यक्रम में हिन्दी विषय को हटाने का उत्तराखंड नवनिमार्ण सेना ने किया विरोध।

देहरादून-हम हिंद देश के वासी हैं और हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है।लेकिन इस हिंद देश को तो हमने अंग्रेजों से बचा लिया, पर हिंदी भाषा को कैसे बचाएं? आज ये स्थिति हमारे सामने आ गई है।दर असल देश और दुनियों में शिक्षा के लिए विख्यात दून स्कूल में अब हिन्दी विषय को हटाने की बात चल रही है साथ ही संस्कृत को भी बैकल्पिक विषय के तौर पर रखा जा रहा है।इसका विरोध तमाम राजनीतिक पाटियों के अलावा बुद्विजीवी वर्ग भी कर रहा है।
जो हिंदी भाषा हमारी राष्ट्रभाषा है। जिस हिंदी को कई पौराणिक ग्रंथों में संजोया गया है। देवभूमि और भारत में जो हिंदी अपनी संस्कृति, परम्परा के साथ अपने गौरवमई इतिहास को बनाए हुए है । आज हम कह सकते हैं कि वो हिंदी खतरे में हैं। जिसको हम एक छोटे से उदाहरण नामी गिनामी निजी स्कूलों से हिन्दी विषय को हटाने के रूप में देख सकते हैं।
सामाजिक पार्टियों को चिंता है कि 19 सालों में क्षेत्रीय भाषाओं को अभी तक साशन प्रशासन पाठ्यक्रमों में लागू नहीं करवा पाया और अब हिंदी भाषा को दरकिनार किया जा रहा है। जो माथे पर चिंता की लकीरों को और बढ़ावा दे रहा है। दानिशमंदों की भी मानें तो यह कोई अच्छे संकेत नहीं कि स्कूलों से हिंदी को ही बाहर कर दिया गया है। उनका मानना है कि इस गंभीर विषय पर न तो राज्य सरकार का ध्यान है और ना ही केन्द्र सरकार का।
बड़े-बड़े ग्रंथ,साहित्य और इतिहास गवाही देता है कि हिंदी भाषा का एक गौरान्विंत इतिहास रहा है। लेकिन जिस तरीके से निजी स्कूलों हिंदी को प्राथमिकताएं नहीं दे रहे हैं और विषयों को भी वैकल्पिक तौर पर रख दिया गया है उससे आने वाले दिनों में हिंदी भी खतरे की जद में होगी।