क्रौंच पर्वत पंहुची देवसेनानी कार्तिक स्वामी की देवरा यात्रा

क्रौंच पर्वत मंदिर में पूजा-अर्चना करते खुरड़ के कार्तिकेय भक्त

खुरड़ गाँव के कार्तिक स्वामी की देवरा यात्रा के दूसरे दिन देवसेनानी कार्तिकेय के पश्वा तथा भक्तों ने क्रौंच पर्वत स्थित कार्तिक स्वामी मंदिर में पूजा व यज्ञ सम्पन्न किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे, जिनके जयकारों के समवेत स्वरों से पूरा क्षेत्र गुंजायमान हो गया। कार्तिक स्वामी के महंत नंदू पुरी जी, कोटेश्वर के श्रीमहंत शिवानंद गिरी जी महाराज, खुरड़ कार्तिक स्वामी के पश्वा बलवीर सिंह बुटोला तथा आचार्य प. सुभाष चौकियाल सहित बड़ी संख्या में स्थानीय देवताओं के पश्वाओं ने मंदिर प्रांगण में परंपरागत विधि से समस्त धार्मिक कृत्य एवं वैदिक विधि से यज्ञ सम्पन्न किया। देवताओं ने भक्तों को आशीष एवं हल्दी-चंदन-अक्षत का तिलक छिड़क कर प्रसाद प्रदान किया।

विधिविधान से पूजा एवं समस्त धार्मिक अनुष्ठान संपन्न करने के उपरांत वाद्य-यंत्रों व कार्तिक स्वामी के जयकारों के साथ देवरा यात्रा 35 किमी की कठिन पैदल यात्रा पूरी कर वापस खुरड़ स्थित कार्तिक स्वामी मंदिर के अपने थान पर विराजमान हो गई। देवसेनानी कुमार कार्तिकेय की इस भव्य दिवारा यात्रा में सभी स्थानों पर श्रद्धालुओं ने देवता व यात्रियों का उत्साहपूर्ण ढंग से स्वागत-सत्कार कर अपनी भक्ति-भावना का प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीणों की भागीदारी ने इसे जो व्यापक स्वरूप प्रदान किया, उसके लिए कार्तिक स्वामी मंदिर समिति ने सभी धर्मप्राण जनता एवं सहयोगियों के आभार व्यक्त किया है।

ज्ञातव्य है कि बुटोलावंशीय हिम्मत सिंह बुटोला ने क्रौंच पर्वत स्थित कार्तिक स्वामी के मंदिर का प्रारंभिक निर्माण किया था। बुटोला लोग कार्तिक स्वामी को अपना आराध्य देव मानते हैं। इसीलिए कार्तिक स्वामी के मंदिर बुटोलाओं के आदि ग्राम चापड़, गंधारी, खुरड़, सन आदि गांवों में स्थापित हैं, जहाँ पूजा-अनुष्ठान की परम्परा है। खुरड़ में कार्तिक स्वामी के मंदिर का निर्माण सन 2001 में कई गई थी। क्रौंच पर्वत के लिए यहाँ से यह पहली यात्रा थी।

-वरिष्ठ पत्रकार रमेश पहाड़ी की कलम से।