जौनपुर में मरोज की तैयारियों जोर पर

मोहन थपलिपाल,नैैैनबाग
जौनपुर का सुप्रसिद्ध पौराणीक माघ मरोज त्यौहार की तैयारी जोर शोर से शुरू हो गई है । जिसमें पूरे शबाब के साथ माघ मरोज त्यौहार 13 जनवरी को धूमधाम से मनाया जाएगा ।
जनपद टिहरी के जौनपुर द्वितीय की पौराणिक लोक संस्कृति पर आधारित माघ मरोज त्यौहार जौनपुर द्धितीय सहित जौनसार,बावर व पट्टी गोडर का सुप्रिद्व पौराणीक त्यौहार 13 जनवरी को हर्ष उल्लास के साथ जौनपुर की पौराणिक रेश्मी रीति रिवाज व संस्कृति के साथ मनाया जाएगा।
ग्रामीणों द्वारा त्यौहार की तैयारियां जोर शोर से की जा रही , गॉव से बाहर नौकरी आदि मे लोगों समय अनुसार गांव आने का सिल सिला शुरू हो गया। और 13 जनवरी आयोजित होने वाला मरोज को एक दिन के वजाय 9– 10 जनवरी से लोग समय को देख त्यौहार को मनाना आरंभ कर दिया हैं । जिसमें समय की कमी के चलते लोगो आगे पिछे बकरा काटकर त्योहार में हिस्सा ले रहे है।
बता दे कि माघ मरोज में मुख्य उद्देश्य ह्रै कि अपनी पौराणिक लोक संस्कृति के संरक्षण,सर्बधन व धरोवर के रुप बचना है।
जिसमें एक माह तक चलने वाले इस त्यौहार में मध्यरात्रि तक लोग बारी-बारी से गांव में सामुहिक तौर पर एक बडे मकान में ढोल या ढोलकी की थाप पर नृत्य के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम का भूरपुर आन्दन उठाते है ।
इस त्यौहार में मुख्य तौर पर गांव की दाणियां को माइके बुलाकर इस दावत में विशेष आमंत्रित करने के साथ रिस्तेदार भी पहुचे है। जो प्राचीन समय से चली आ रही परंपरा आज भी कायम है ।
मुख्य बात यह कि इस बार भारी बर्फवारी होने के त्यौहार में चार चांद लग गये। ग्रामीण बर्फवारी की शीत लहर व कंकडाती ठंड में जमकर आनंद लिया जाएगा ।
जिसमें सबसे ज्यादा लुप्त ऊंचाई वाले ग्रामीण के उठाएगे
लेकिन पश्चात संस्कृति के चलते धीरे धीरे लोग पौराणीक त्यौहार रिति रिवाज व लोक संस्कृती की कमी से एक दिन को मनाने के बजाय आगे पीछे इस मरोज त्यौहार मना रहे हैं ,जिसका मुख्य कारण है कि समय के अभाव के माना जा रहा है।
स्थानीय बुजुर्ग गजे सिंह रावत,मोहन लाल कवि, दीवान सिंह रावत का कहना है कि आज की युवा पीढ़ी को अपनी पौराणिक लोक संस्कृति और रीति-रिवाजों ,त्यौहार को कायम रखने के लिए आगे आना चाहिए । जिससे अपनी जौनपुर की पहचान वह संस्कृति को धरोहर करो रूप में आगे बढाया जा सके।