ऐतिहासिक झंण्डा मेला मैं उमडा रैला.

उमडा रैला, ऐतिहासिक झंण्डा मेला

देहरादून झंडा मेले की विधिवत शुरूवात हो गई है। मेले में देश के कोने-कोने से हजारो की संख्या में श्रद्धालुओ की भीड़ राजधानी देहरादून पहुंच रही है। विशेष पूजा-अर्चना के बाद पुराने झंडेजी को विधि-विधान से उतारकर पुराने गिलाफ हटाया गया वही इस मेले को लेकर कई दिनों से लोगों का जमधट लगा हुआ है।
प्रेम, सद्भावना, भाईचारे, मानवता, श्रद्धा और आस्था का प्रतीक झंडेजी मेले का आगाज हर्षोउल्लास से हो गया। पुराने झंडेजी नए झंडेजी को गाय के दूध, दही, घी, मक्खन, गोमूत्र, गंगाजल से स्नान कराया जायेगा मेले को लेकर श्रद्धालुओ की काफी भीड़ लगी रही। श्री दरबार साहिब के सज्जादानशीन महंत देवेंद्र दास महाराज जी हजारों संगतों की मौजूदगी में शाम पांच बजे झंडेजी का आरोहण किया।
इस अवसर पर देश-विदेश से पहुंची हजारों संगतें इस पावन बेला की साक्षी बनेंगी। महंत जी ने बताया की दर्शनी गिलाफ के लिए 2117 तक लोगांे की बुकिंग पहुंच चुकी है। और जिनकी मन्नते पूरी हो जाती है उनके द्वारा यह गिलाफ चढ़ाया जाता है जिसके लिए पीड़ीयो तक इन्तजार किया जाता है।
गौरतलब है कि झंडेजी मेले का इतिहास देहरादून के अस्तित्व से जुड़ा हुआ है। श्री गुरु रामराय महाराज जी का देहरादून आगमन 1676 में हुआ था। गुरु महाराज जी ने श्री दरबार साहिब में लोक कल्याण के लिए एक विशाल झंडा लगाकर लोगों को इस ध्वज से आशीर्वाद प्राप्त करने का संदेश दिया था। इसके साथ ही श्री झंडा साहिब के दर्शन की परंपरा शुरू हुई। श्री गुरु रामराय महाराज को देहरादून का संस्थापक कहा जाता है। श्री गुरु रामराय महाराज जी सिखों के सातवें गुरु गुरु हरराय के ज्येष्ठ पुत्र थे। उनका जन्म होली के पांचवें दिन वर्ष 1646 को पंजाब के जिला होशियारपुर (अब रोपड़) के कीरतपुर गांव में हुआ था। जिसके बाद से राजधानी देहरादून में उनके जन्म दिन के मौके पर इस मेले का आयोजन किया जाता है, जिसमे लाखो की संख्या में लोग पहुंचते है और अपनी मन्नते को मांगते है इस बार कई श्रद्धालु मेले में पहुंचे हुए है।