वैैज्ञानिक दृष्टिकोण अपना कर किया जा सकता है जल संरक्षण- प्रो.एमपीएस बिष्ट

भारत सरकार के जल शक्ति मिशन के तहत उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केन्द्र व उत्तराखडं साइंस एजुकेशन रिसर्च सेंटर की ओर से उत्तराखंड की बड़ी नंिदयों से लेकर छोटे-छोटे गाड़-गधेरों का रासायनिक विश्लेषण किया जा रहा है। इसके तहत इन नदियों के साथ ही छोटे-छोटे गाड़-गदेरों का जल स्तर एवं शुद्वता का आंकलन यूसेक की टीम इसमें जुटकर डाटा एकत्रित करने का काम कर रही है।गौरतलब है कि केन्द्र सरकार का जल शक्ति मिशन एक ड्रीम प्रोजेट है,और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस मिशन पर खास नजर बनाये हुऐ है।

इस मिशन के एक पहलू को धरातल पर उतारने के लिए नदियांे का रासायनिक विश्लेषण व शुद्वता का आकलन करने के लिए कार्य योजना तैयार की गई है।इसकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी यूसेक व यूसर्क के निदेशक प्रो.एमपीएस बिष्ट व उनकी टीम ने संभाली है।उपग्रह की मदद व मैपिंग से नदियों के जल स्तर का डाटा तैयार कर केन्द्र सरकार को भेजा जायेगा।इससे जलस्तर में कमी वाली नदियों के संरक्षण का कार्य जल शक्ति मिशन के अंतर्नत किया जा सकेगा।साथ ही नदियों में पाये जाने वाले रासायनिक तत्वों और उसका मानवीय जीवन पर पढ़ने वाले प्रभाव का अध्ययन भी किया जायेगा।


प्रो एमपीएस बिष्ट -जल संरक्षण के लिए विकास खंड स्तर पर प्रशिक्षण कार्ययोजना तैयार की गई है।उत्तराखंड के प्राकृतिक जल स्रोतों को समय रहते बचाना अनिवार्य है।