जल संग्रहण कम समय मैं किफायती तकनीकी “हार्क” से सीखे .

जल संग्रहण की एक आसान तकनीक-जियो टैंक (Geo Tank)
सर्व विदित है कि हिमालय एक बहुत ही संवेदनशील भौगोलिक संरचना है। जहाँ भूमि धसाव एवं भूर्गभीय हलचलें एक आम बात है। जिसका ज्वलंत प्रमाण  6 दिसम्बर 2017 को 8-30 बजे 5-2 तीव्रता भूकम्प ने दशतक दी। दूसरी ओर हमारे पिछले तीस चालीस साल के विकास ने अनियंत्रित जलवायु परिवर्तन हमारे प्राकृतिक हमारे संसाधनों की उपलब्धता को बहुत ही अनुसचित कर दिया है। जहाँ एक ओर जल संसाधन तो सिमटते ही जा रहे है वहीं दूसरी ओर जल आपूर्ति की माँग दिनों दिन बढ़ती जा रही है। जिसका अत्यधिक प्रभाव कृषि क्षेत्र में साफ दिखाई देता है। साथ ही भूमि धसाव के कारण सीमेंट से बनी संरचनायें जल संग्रहण के लिए स्थायी समाधान नहीं है। 


इसलिए आज यह अत्यन्त आवश्यक कि जल के सीमित संसाधनों का समुचित वैज्ञानिक तरीके से समुचित उपयोग तो करना ही है साथ ही वर्षा के जल को संग्रहण कर बड़ी मात्रा में उपयोग में लाने की ज़रूरत है। पिछले दो दशकों में जल संग्रहण की सस्ती एवं उपयोगी तकनीकों का विकास हुआ और उनका प्रयोग भी हो रहा है परन्तु अभी भी रूझान में बहुत कमी है।


इसी क्रम में जल संग्रहण की नई तकनीक जिसका नाम जियो टैंक है। जिसका निर्माण प्रर्दशन हार्क के नौगाँव परिसर में किया गया। इसके लिए जमीन के ऊपर 11×3-50 फीट की समतल जगह की आवश्यकता होती है और इसकी जल भण्डारण क्षमता 10-200 लीटर होती है। इसकी लागत करीब 3-50रू- प्रतिलीटर आती है। विशेष बात ये है कि इसका निर्माण मात्र 4 घंटे में कर लिया जाता है और इसके बनाने में बहुत कम परिश्रम की आवश्यकता होती है। साथ ही इसे कहीं भी स्थानांतरित किया जा सकता है।


इसलिए जियो टैंक को किसानों द्वारा अपनाना उन क्षेत्रों में महत्वपूर्ण रूप से लाभकारी होगा जहाँ पानी लघु-सिंचाई के लिए एक समस्या बन गया है और पानी की नमी की उपलब्धता और मृदा नमी की कमी आदि जैसी समस्याओं को सुलझाना जो एक साथ गुणवत्ता वाले फसल उत्पादन में परिणाम और किसानों को अच्छी कमाई प्रदान कराती है। सुदूरवर्ती दुर्गम क्षेत्रों जहाँ रास्ते आज भी नहीं है वहाँ के लिए ये तकनीक बहुत उपयोग होगी। हिमालयन एक्शन रिसर्च सेन्टर की इस तकनीक का प्रदर्शन बागेश्वर जिले में भी करने की योजना है।