विदेशी कंपनियां खोलेगी पहाड़ी बंजर गांवों में होम स्टे-डॉ. के.एस.पंवार

-पर्वतीय जिलों में तीन लाख हेक्टेयर जमीन बंजर
-लगातार हो रहे पलायन के लिए संजीवनी का काम करेगा हो स्टे व ईको टूरिज्म।
-राज्य गठन के 18 साल बाद 17 प्रतिसत कृर्षि भूमि कम हुई है।


देहरादून:आगामी 7 और 8 अक्टूबर का सूबे में आयोजित होने वाले इन्वेटर समिट के जरिये पर्यटन डस्टिनेशन व इको टूरिज्म सेक्टर में निवेश करने के लिए राज्य सरकार को कई मल्टी नेशनल कम्पनियां की ओर से प्रस्ताव मिल रहे है।ये कम्पनियां प्रदेश के दूर दराज क्षेत्रों में डस्टिनेशन के रूप में विकसित करना चाहते है। अब सरकार स्थानीय लोगों को कम्पनियां के साथ लोकल पार्टनर बनाने का प्रयास कर रही है। जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार के साथ -साथ भूमि के बदले पैसा भी मिलेगा।


मुख्यमंत्री के औद्योगिक सलाहकार डॉ. के.एस.पंवार का कहना है कि राज्य में पर्यटन उद्योग की भारी संभावनाये है। इसी को मध्य नजर रखते हुए राज्य सरकार होम स्टे में निवेश करने के लिए निवेशकों को प्रोत्साहित कर रही है।ग्रामीण क्षेत्रों में जिन लोगों के पास बंजर भूमि पडी है वो अपनी जमीन को कम्पनियां को किराये में देकर पार्टनर बन सकेगें और लीज पर दी गई जमीन का ग्रामीणों को अलग से पैसा मिलेगा। होम स्टे पर सारा खर्चा कम्पनियां करेगी,साथ ही पर्यटकों को लाने और अन्य सुविधायें देने का काम भी कम्पनियां खुद करेंगीं। सरकार का प्रयास है कि होम स्टे के उन गांवों को चिन्हित किया जाय जहां खेती कम है और पर्यटन को बडावा दिया जा सकें ऐसे गांवां में 10-10 ग्रामीणों या महिला मंडल के समूह बनाकर कंपनियां के साथ अनुबंध किया जायेगा।


गौरतलब है कि, इंवेस्टर्स समिट के प्रचार प्रसार के रोड़ सो के दौरान देश विदेश के निवेशकों ने पर्यटन के क्षेत्र में निवेश करने की इच्छा जताई थी। प्रदेश के पर्यटन को बडावा देने के लिए सरकार ने टूरिज्म को उद्योग का दर्जा दिया है। इनवेस्टर समिट के माध्यम से होम स्टे में निवेसकों को लाया जा रहा है। साथ ही देश विदेश के नामी टूर व ट्रेवल्स के साथ साथ कई बडे ग्रुप उत्तराखंड में अपने छोटे-छोटे पयर्टन डस्टीनेसन व ईको टूरिज्म को विकसित करने पर फोकस कर रहे है। जंगली जानवरों व मौसम की मार से परेसान पहाडी किसानों का लगातार कृर्षि से मोह भंग हो रहा है। जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार कृर्षि भूमि बंजर होती जा रही है। ऐसे में होम स्टे और इकों टूरिज्म में विदेशी कम्पनियां मे निवेस से रोजगार की आस जगी है जिससे नासूर बन चूके पलायन पर भी काफी हद तक रोक लग पायेगी।
-भानु प्रकाश नेगी,देहरादून