लाॅकडाउन में अवसर खोज हिमानी बनी आत्मनिर्भर

हर आपदा एक अवसर लेकर आती है, बस इसे भुनाने का हुनर होना चाहिए। इस बात को साबित कर दिखाया है धरमघर की रहने वाली हिमानी ने। ग्रामीण परिवेश की होने के बावजूद वह लोकल में वोकल की मुहिम चलाकर युवाओं के लिए नजीर पेश कर रही हैं। उन्होंने लाॅकडाउन के दौरान मिली छुट्टियों में हस्तशिल्प को बढ़ावा दिया। जिसमें अखबार, गत्ते और घर की अनुपयोगी सामान का प्रयोग कर विभिन्न प्रकार की सजावटी व उपयोगी वस्तुएं बना डाली। इन दिनों वह स्वयं के लिए राखी बनाने के साथ वह इनसे कमाई भी कर रही है। चाइनीज राखियों के विरोध के चलते उनकी बनाई राखियां लोगों का लुभा रही हैं। अब तक वह 500 से अधिक राखियां बेचकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर बनने की मुहिम को साकार कर रही है।

 कोरोना महामारी के चलते लगे लाॅकडाउन का सदुपयोग करते हुए हिमानी ने हस्तशिल्प में हाथ आजमाया। उन्होंने घर के भीतर रखे अनुपयोगी सामान अखबार, गत्ते और पुराने सामान से विभिन्न प्रकार की उपयोगी वस्तुएं बनानी शुरू कर दी। इस बीच रक्षाबंधन को देखते हुए उनके मन में घर पर ही राखियां बनाने का विचार आया। उन्होंने घर पर रखे ऊन और गत्तों का प्रयोग कर राखियों का निर्माण शुरू किया। जिसमें उन्होंने लोक संस्कृति की प्रतीक ऐपण को उकेरा। उन्होंने राखी में पारंपरिक कलाकृतियों का निर्माण किया। उनका यह प्रयोग लोगों को बेहद पसंद आया। जिसके बाद उनके पास राखियों की डिमांड आने लगी। अपने गांव और आसपस के क्षेत्र में ही वह 500 राखियां बेच चुकी हैं। जिससे मिलने वाली धनराशि का उपयोग वह गांव की अन्य लड़कियों को हस्तशिल्प का प्रशिक्षण देने में करेंगी।

 एमएससी की छात्रा हिमानी का यह अभिनव प्रयोग युवाओं को प्रेरणा देने वाला है। उन्होंने शिक्षा के साथ अपनी रचनात्मकता को भी निखारने का काम किया। जो भविष्य में उन्हें पहचान दिलाने के साथ रोजगार का माध्यम भी बन सकता है।