स्वास्थ्य का बदलता परिवेश…..उत्तराखंड कहां ?-Dr.S.N.Singh, सीनियर आर्थो सर्जन कोरोनेशन अस्पताल,Dehradun

यह कथन सत्य है कि समय के साथ-साथ सभी चीजों में बदलाव हो जाता है और बदलाव प्रकृति का नियम भी है।वर्तमान समय की स्थिति और परिस्थिति इतनी तेजी से बदल रही है कि इंसान चाह कर भी अपने स्वास्थ्य का ख्याल नही रख पा रहा है।समय के साथ बदलते परिवेश में हर प्रकार की मानवीय सुविधायें बडने से उसकी शाररिक गतिविधियों कम हो गई है,साथ ही खान-पान में नकली और मिलावटी सामान होने के कारण उसे अपनी सेहत के साथ खिलवाड़ सहना पड़ रहा है।क्यांकि इन्सान को खुद की सेहत का ख्याल खुद ही रखना होता है,इसलिए स्वस्थ जीवन जीने के दो पहलू है,बचाव और निवारण।
शुद्व जल,वायु और पोषण से स्वस्थ जीवन की परिकल्पना।
अगर हम अपने स्वास्थ्य के बचाव की ओर ध्यान दे तो हमें शुद्व जल,वायु,और पोषण का विशेष ध्यान रखना होगा।शुद्व जल की बात की जाय तो यह सबसे बड़ी समस्या हमारे सामने आ रही है। पृथ्वी के तीन चौथाई भाग में पानी होने के बावजूद भी हमारे पास सिर्फ 3 प्रतिसत ही पीने का पानी है,और वह मानव द्वारा दूषित किये जाने के कारण सीधे तौर पर पीने योग्य नही होता है। यदि पानी साफ न हो तो वह हमारे शरीर में 90 प्रतिसत बीमारी का कारक बनता है।इसलिए सबसे पहले हमें शुद्व पानी की व्यवस्था करनी होगी। स्वस्थ रहने के लिए दूसरा सबसे बडा कारक शुद्व हवा है जिससे हमारे फेफडों में शुद्व आक्सीजन पंहुचे सके लेकिन आज के समय में बेतरतीव तरीके से बड़ते वाहनों,जहर उगलते हानिकारक उद्योग,और पड़ों को काट कर दिनों िंदन उगते कंकरीट के जंगलों के कारण शुद्व हवा मिलनी मुस्किल हो गई है। स्वस्थ रहने का तीसरा सबसे महत्वपूर्ण कारक शुद्व पोषण है जो हमारे शरीर के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। हमारे देश में सन्1951-52 में फूड एडिसनल एक्ट बना था लेकिन दुर्भाग्य से वह सक्ती से लागू नही हो पाया है। और आज के समय में दूध, धी, तेल,आटा,चावल से लेकर साग-शब्जियों तक में मिलावट की जा रही है। जिससे लगातार जानलेवा बीमारियों का प्रकोप बडता जा रहा है। इन सब मिलावटों से बचने के बावजूद भी अगर बीमारियां होती है तो रोगों के निवारण के लिए अच्छे अस्पतालों की आवश्यकता होती है। जिसमें सभी प्रकार की सुविधायें होनी चाहिए जो सरकारी अस्पतालों में नही है। प्रायवेट अस्पतालों पर सरकार का शिकंजा कसना तो ठीक बात है लेकिन उससे पहले सरकारी अस्पतालों को इस लायक बनाना होगा जिससे आम आदमी को सरकारी अस्पतालों में हर प्रकार के इलाज की उचित व्यवस्था मिल सके।
सरकारी अस्पताल को कैसे सुधारें!
सरकारी अस्पतालों में सबसे पहले आपातकालीन सेवाओं को सुधारने की आवश्यकता है। जो बर्तमान समय में काफी दयनीय स्थित में चल रही है। दूसरा सबसे महत्वपूर्ण सुधार विशेषज्ञ डॉक्टरों की व्यवस्था का है।सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टर तो होते है,लेकिन उनको अन्य सेवाओं जैसे बी.आई.पी.पोस्ट मार्टम,यात्रा,कोर्ट आदि डुयूटियों में व्यस्त रखा जाता है। इसके बाद समय मिलता है तो विशेषज्ञता का काम कराया जाता है।
सरकारी अस्पतालों खो रहे है आम जनता का विशवास!
सरकारी अस्पतालों में विषेशज्ञ डॉक्टरों की कमी या समय पर उपलब्ध न होने के कारण सरकारी अस्पताल लगातार अपनी विश्वसनीयता को खो रहे है।सभी प्रकार की क्रियेटिकल सर्जरी सरकारी अस्पतालों से प्रायवेट अस्पतालों में रेफर की जाती है। क्योंकि सरकारी अस्पतालों में न ही विशेषज्ञों की टीम और न ही अन्य सुविधायें होती है।सरकारी अस्पताल में मरीज के साथ कुछ भी गडबडी होने पर डॉक्टरों के साथ गलत व्यवहार तक कर लेते है। फिर डॉक्टर का कोर्ट,कचहरी तथा तंत्र का साथ न होना सरकारी अस्पताल के डॉचेगत स्वरूप को खराब कर रख दिया है।
सरकारी अस्पतालों में मैनेजमैन्ट का आभाव
सरकारी अस्पतालों की विफलता का मुख्य कारण मैनेजमैन्ट की अनियमितता है। डॉक्टरों के पास मरीजों की भीड़ होती है। सबको जल्दी रहती है। भीड़ को नियंत्रित करने की सुविधा नही होती है। मरीज और डॉक्टर के बीच संवादहीनता के कारण मरीजों को नुकसान और डॉक्टरों पर तनाब होता है। समय समय पर डॉक्टरों की विशेषज्ञता की ट्रेनिंग,नई दवाओं की जानकारी और नये-नये मेडिको लॉ की जानकारी के लिए मीटिंग की जानी चाहिए,तभी सरकारी अस्पतालों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का आम जनता को लाभ मिल पायेगा।
आपातकालीन सेवाओं में सुधारीकरण की आवश्यकता
सरकारी अस्पतालों में आपतकालीन सेवा के मजबूत होने पर ही आम आदमी को उचित इलाज मिल पायेगा,आपातकालीन के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम,अत्याधुनिक उपकरण,और दवाओं के साथ-साथ साफ सफाई का विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता है। इस बात पर विशेष ध्यान देने की आवश्कता है कि सरकारी अस्पताल के विशेषज्ञ डॉक्टरों को अन्य डुयूटियां से फ्री रखा जाय ताकि आपतकालीन सेवाओं में वह अपना पूर्ण सहयोग के साथ तन मन से काम कर सकें।
संकलन-भानु प्रकाश नेगी।