समाज कल्याण विभाग की बेरूखी से पेंन्सन के लिए भटक रही है विकलांग।

समाज कल्याण विभाग की लापरवाही से पेंन्सन के लिए दर-दर भटक रही है विकलांग।


//भानु प्रकाश नेगी//


देहरादून/डालनवाला: समाज कल्याण विभाग की लापरवाही एक बार फिर सामने आयी है,इस बार मामला विकलांग की पेंन्सन को लेकर है, पीड़ित के परिजन एक साल से अधिक समय से विभाग के चक्कर लगाकर थक गये है,लेकिन विभाग तमाम बहाने बनाकर उन्हें भटका रहा है।
मामला एम.डी.डी.ए कॉलानी डालनवाला अधाईवाला क्षेत्र निवासी आचार्य विजेन्द्र प्रसाद ममगाई की विकलांग बेटी रीना ममगाई(22) का है।स्नातक(बीएससी) पास रीना ममगाई पावों से अपाहिज है। विजेन्द्र ममगाई का कहना है कि सभी मानक पूरे होने के बावजूद भी विभाग पेंन्सन के लिए बेवजह की दलीले दे रहा है।

 

मूल रूप से जनपद रूद्रप्रयाग के तहसील जखोली ग्राम उरोली(इजरा) बजीरा क्षेत्र निवासी आचार्य विजेन्द्र प्रसाद ममगाई काफी समय से डालनवाला क्षेत्र अधोईवाला में अपना आवास बनाकर रहते है। सभी कागजी कार्यवाही के बावजूद भी विभाग के अधिकारी एक साल से भी अधिक समय से चक्कर कटवा रहे है।
विकलांग रीना ममगाई के पिता का कहना है कि, बचपन में रीना के पीठ में रसैली थी जिसका ऑपरेसन पीजीआई चण्डीगढ में किया गया था डॉक्टरों ने ऑपरेसन के दौरान बताया था कि मरीज के पांवों में कमी आ सकती है जो स्वाभाविक प्रक्रिया है। बाद में पैरों के लिए विशेष जूते बनाये गये जिसके बाद वह अब चलने लायक हुई है। विकलांग होने की वजह से उसकी शिक्षा जरूरी थी। काफी मुस्किलों से स्नातक पास कराया है।

वर्ष 2017 में विकलांगों के लिए गीता भवन में कैम्प के दौरान सभी कागजी कार्यवाही पूरी कर दी गई थी लेकिन आज तक काई जबाव विभाग से नही मिला है।इस वर्ष अप्रैल में गीता भवन में फिर से कैम्प के दौरन कागज जमा किये फिर भी अभी तक कोई जबाव नही आया है। समाज कल्याण विभाग की अब यह दलील है कि विकलांग का आय प्रमाण पत्र चाहिए। क्योकि विकलांग सामान्य जाति की है उसकी पेंन्सन नही लग सकती है।
गौरतलब है कि,पिछले दिनों समाज कल्याण विभाग के अधिकारी विभिन्न घोटालों में लिप्त पाये गयें थें। समाज कल्याण विभाग में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहराई तक पंहुच चुकी है इस बात का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि एक विकलांग के पेंन्सन के लिए सभी कागजी कार्यवाही करने के बावजूद भी उसे दर दर भटकनें के लिए मजबूर किया जा रहा है। विकलांग में भी जाति/ धर्म का बहाना बनाया जा रहा रहा है।