हृदय रोगियों के लिए कोरोना 10% ज्यादा घातक

  ह्रदय हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग होता है हर साल 29 सितंबर को विश्व ह्रदय दिवस के रूप में मनाया जाता है। भारत में पहले इसे वृद्ध लोंगों का रोग माना जाता था लेकिन अब यह रोग 30 साल से अधिक और कई बार इससे कम उम्र के लोगों में पाया जाता है। विश्व में हर साल करोड़ों लोग  ह्रदय रोग के शिकार हो जाते है। वही भारत में भी इस रोग से लाखों लोगों की असमय मौत हो जाती है,जिसका प्रमुख कारण आजकल की तनाव पूर्ण, जंक फूड,ध्रुमपान की लत भरी जिन्दगी है।वही कोरोना काल में इस बीमारी से मरने वालों की तादत दस गुना ज्यादा हो गई है।कोरोना फैमली का बायरस जिन तीन अंगों पर असर डालता है उनमें  हृदय भी एक प्रमुख अंग है। कोरोना संक्रमण के बाद एंटी वायरल दवाओं का डोज हार्ट अटैक जैसी स्थिति बना देती है।इन दवाओ सें धमनियों में रक्त का थक्का जम जाता है।जिससे हार्ट अटैक के होने का खतरा बन जाता है।

हार्ट पर नजर आ रहे है एक्सीडेंटल प्रभाव

र्हाट विशेषज्ञों का कहना है कि वायरस का इस पर सीधा असर तो नहीं दिख रहा है पर एक्सीडेटल प्रभाव जरूर देखने को मिल रहें।संक्रमण के बाद इसके प्रोटीन रक्त में मिलने से और फिर धमनियों में थक्का जमने से दिक्कतें आ रही है।कोरोना संक्रमति हार्ट के रोगियों की निगरानी रखना आवश्यक है।

2 प्रतिसत एटीवायरल दवाओं का दुष्प्रभाव

हार्ट के डाॅक्टरों के अनुसार एक से दो प्रतिसत कोरोना मरीजों में एंटीवायरल दवाओं का दुष्प्रभाव देखने को मिल रहा है।इन मरीजों में अचानक रक्त संचार प्रभावित होता है,और मरीजों के शरीर प्रक्रिया देना बंद कर देता है।इस गंभीर स्थिति के चलते मरीज के मौत की आशंका बढ़ जाती है।

आर्ट के मरीजों में संक्रमण के 10 प्रतिसत मरीज अधिक

डाॅक्टरों का कहना है कि करीब 20 फीसदी 60 वर्ष से अधिक उम्र के हार्ट रोगी संक्रमण के बाद अस्पताल पंहुच रहे है। एक अध्ययन के अनुसार कोरोना के गंभीर होने में हार्ट डिजीज होने की संभावना 10 प्रतिसत अधिक है।साथ ही कोरोना वायरस से हार्ट की मांसपेशियां प्रभावित हो रही है।