कंडाली की हर्बल चाय ने बदली दान सिंह की किस्मत, घर बैठे हो रहा है शुद्ध मुनाफा

अल्मोड़ा: नोबड़ा निवासी दान सिंह रौतेला ने कोरोना काल में भी हिम्मत नहीं हारी। पहाड़ी बिच्छू घास से जायकेदार हर्बल चाय तैयार कर हजार रुपए प्रति किलो के दाम से बेच रहे हैं ।बड़ी-बड़ी कंपनियां इस चाय को खरीदने में दिलचस्पी दिखा रही है। दान सिंह रौतेला दिल्ली मेट्रो की नौकरी छोड़कर गांव लौटा तो उसने यह तय किया कि अब रोजी-रोटी का इंतजाम भी गांव में रहकर ही करना होगा ।

प्रतिरोधी क्षमता बढ़ाने के लिए बुजुर्गों से बिच्छू घास कंडाली का जो नुक्सा मिला उसे ही महा संकट में अवसर में बदल दिया। केवल दिल्ली में ही अब तक 40 किलो कंडाली हर्बल चाय भेज चुके हैं इस नौजवान को नामी मार्केटिंग कंपनी अमेजन से डेढ़ सौ किलो चाय की डिमांड आई है। दान सिंह ने जून के पहले सप्ताह में कंडाली से हर्बल चाय बनाकर बाजार में उतार दी ।
राजधानी दिल्ली में हर्बल टी की मांग लगातार बढ़ रही थी जिससे उन्हें थोक विक्रेता मिल गए । बीते दिनों में ही अमेजन कंपनी ने उन्हें डेढ़ सौ किलो चाय तैयार करने का आर्डर दिया। उन्होंने इस हर्बल चाय की कीमत ₹1000 किलो  रखी है। राम सिंह ने कंडाली की हर्बल चाय बनाने के लिए इसमें तुलसी तेजपत्ता और अमरूद की पत्तियों के अलावा लेमनग्रास भी मिलाई है। यह सभी चीज स्थानीय स्तर पर उपलब्ध भी है और इससे चाय का जायका और गुणवत्ता बढ़ जाती है। खेत और जंगलों से पतियों को चुनकर लाते हैं धूप में 3 दिन तक सुखाते हैं फिर तना आदि को अलग कर पतियों को हाथ से ही मसलकर थैलियों में पैक किया जाता है जो लंबे समय तक सुरक्षित रहती है।