हंस फउंडेशन ने फिर दिखाई दरियादिली, तीमारदारों ने जताया आभार

⊄सीनियर न्यूरो सर्जन डॉ महेश कुडियाल व उनकी टीम की मेहनत लाई रंग।
सीएमआई अस्पताल प्रसाशन में खुशी।
सीएमएस डॉ अजीत गैरोला ने जताई खुशी।
बच्चे के तीमारदारों ने किया हंस फांउडेसन,सरकार,व अस्पताल प्रसाशन का थैक्स।


भानु प्रकाश नेगी


“जाको राखे साईयां मार सके न कोई” की कहावत आपने खूब सुनी होगी… लेकिन यह कभी- कभी सही साबित होती है। पिछले दिनों चकराता  में एक कार दुर्धटना के दौरान खतरनाक हादसे में एक बच्चें को इतनी चोटें आई गई कि उसका बचना नामुकिंन सा था।लेकिन इसे चमत्कार कहे या डॉक्टरों की मेहनत…. उसको अस्पताल से आज छुट्टी मिल गई है।

घटना पिछले दिनों 24 जून की है, जब एक परिवार के कुछ लोग हंसी खुशी एक शादी समारोह में सामिल होने जा रहे थे। लेकिन उन्हें क्या पता था कि कुछ ही पल में वह उनकी अन्तिम यात्रा होगी।जिसमें एक महिला की मौत घटना स्थल पर ही हो गई थी और एक बच्ची की मौत रास्ते में हुई थी।

चमत्कार यह भी थी उसमें सवार एक महिला को शरीर के अन्य भागों में चोट लगी लेकिन गर्भवाली जगह पर कोई चोट न लगी और उसने एक बच्चे को जन्म दे दिया है।

सीएमआई अस्पताल में हंस फांउडेसन व राज्य सरकार की मदद से संभव हो पाया। इस बच्चे की हालत इतनी खराब थी कि बच्चे के बचने की उम्मीद सिर्फ 5 प्रतिसत ही थी। बरिष्ठ न्यूरो सर्जन डॉ महेश कुड़ियाल का कहना है कि जब यह बच्चा अस्पताल में आया तों तब यह बहुत सीरियर हालत में था शरीर के कई भागों में गहरी चोटे थी। एक सप्ताह बाद इसकी हालत और विगड़ गई थी। मेरे साथ  विशेषज्ञ डाक्टरों  की टीम बच्चे को हर हालत में बचाने में लगी थी। आज हमारी मेहनत रंग ला रही है। जिसकी हमें बहुत खुशी है।

-वही बच्चें की एक माह से परिवरिस कर रहे तीमादार का कहना है कि अस्पताल प्रशासन व कर्मचारियों के विशेष प्रयास व माता मंगला जी व  राज्स सरकार की मदद से बच्चे का इलाज बहुत सही तरीके से हो पाया है जिसके लिए हम इनका सदैव आभारी है।और विशेष रूप से हम हंस फाउडेसन का धन्यवाद करते हैं। जिन्होंने हमारी पीड़ा को समझकर मदद की है।

– एक माह से भी अधिक समय से इलाज के बाद आज बच्चे को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।बच्चे की हालत देखकर अस्पताल प्रशासन भी काफी खुश नजर आ रही है। अस्पताल के चेयरमैन डॉ आर के जैन का कहना है कि एक महीने पहले जब बच्चा यहां भर्ती हुआ तो मल्टी इंजरी इसे हो गई थी हालत बहुत खराब होने के बावजूद भी डॉक्टर लगातार प्रयासरत रहे । अस्पताल से छुट्टी मिल रही है जिससे हमें भी काफी खुशी है।