हाईकोर्ट के आदेशों के बाद भी स्लाटर हाउसों की मनमानी जारी

हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी देहरादून के स्लाटर हाउस मे गैरकानूनी रूप से काम चल रहा है.. लिहाजा प्रशासन कोई कार्यवाही नही कर रही है.. वही दूसरी ओर स्लाटर हाउस में बकरों की स्लाटिंग मना करने से मटन के कारोबार में गहरा असर पड़ रहा है..
स्लाटर हाउस के ना खुलने से जहां मटन— चिकन के व्यापार में असर पड़ा है तो वहीं बिना फूड लाइसेंस के चोरी-छिपे स्लाटिंग चल रही है.. खुद व्यापारी बताते है कि स्लाटर हाउस से मटन—चिकन का कटान चल रहा है.. और वहीं से फ्रेश माल लाया जा रहा है.. यही नहीं कुछ व्यापारियों को मटन—चिकन फ्रेश नही मिलने के कारण फ्रोजन मिट को लोगों को बेचा जा रहा है.. दुकानदार बताते है कि फ्रोजन माल को लोग लेना पंसद नहीं कर रहे है.. ऐसे मे मटर—चिकन के कारोबार में काफी नुकसान हो रहा है.. दूसरी ओर स्लाटर हाउस प्रकरण से देहरादून में मटन और चिकन के रेट बढ़ गए हैं.. ऐसे मे फ्रोजन चिकन का करोबार बढ़ रहा है.. इन दोनो कारणों से चिकन—मटन के दाम में बढ़ोतरी देखने को मिल रहा है.. वही लोगो की माने तो वो फ्रोजन की गुणवत्ता पर भरोसा नहीं करते है..

वही जब नगर निगम से बात की तो स्लाटर हाउस को निगम द्वारा बंद कर दिया गया है.. साथ ही अगर गैरकानूनी रूप से अवैध पशु को कांटा जा रहा है तो वो खाद्य सुरक्षा विभाग की जिम्मेदारी है
हाईकोर्ट के आदेश के बाद स्लाटर हाउस तो बंद हो गये है.. लेकिन इसका  सिधा असर करोबारी में देखने को मिल रहा है.. वहीं आम जनता फ्रोजन चिकन पर भरोसा नहीं कर रही है.. लिहाजा गैर कानूनी से चल रही स्लाटिंग की जिम्मेदारी किसकी फिलहाल उस पर सवाल है..