क्या त्रिवेन्द्र सरकार के मंथन से निकल पायेगा 2022 का अमृत?

उत्तराखंड में त्रिवेंद्र सरकार मिशन 2022 फतह करने की तैयारियों में जुट गई है। मंत्रियों और विधायकों के साथ घंटों चले मंथन के बाद भाजपा सरकार और संगठन को भरोसा है कि इससे निकला अमृत अगले विधानसभा चुनाव में पार्टी की नैया पार करने में अहम भूमिका निभाएगा.

 

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की पहल पर सरकार के तीन साल के कार्यकाल में पहली बार मंत्री और विधायक मंथन में जुटे। पार्टी प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत और वरिष्ठ नौकरशाह भी इस कार्यक्रम में मौजूद रहे। सभी मंत्रियों ने अपनी तीन साल की उपलब्धियां गिनाईं। उपलब्धियां, यानी तीन साल में उनके मंत्रालयों ने जनता से जुड़े विषयों पर क्या और कितना कार्य किया। वही 4 महत्वपूर्ण निर्णय भी लिए गए जिसमें अनाथालय में रहने वाले बच्चों के लिए वात्सल्य केंद्र बनाने, 2022 तक हर गांव को सड़क से जोड़ने, रिवर्स पालयन के लिए अलग  से विभाग बनाने, हरिद्वार में साधू सन्तो के लिए समाधि के लिए जमीन देने पर निर्णय लिया गया है।

 

विधायकों की बारी आई तो उनका रोष नौकरशाही पर फूटा। इस पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने हस्तक्षेप किया और अफसरों को सख्त ताकीद की कि निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को पर्याप्त तवज्जो दी जाए। ‘मंथन’ नाम से आयोजित यह कार्यक्रम निर्धारित समय से लगभग तीन घंटा ज्यादा चला। इसकी वजह यह रही कि मंत्रियों ने इस दौरान विधानसभा चुनाव की तैयारियों के क्रम में अपने मंत्रालयों का अगले दो साल का रोड मैप भी पेश किया। फिर विधायकों ने बताया कि उन्हें सरकार से किस तरह की अपेक्षाएं हैं। विधायकों ने खुलकर विकास योजनाओं को लेकर अपने सुझाव भी दिए।  मंथन कार्यक्रम के दौरान मंत्रियों ने अपने तीन साल के कार्यकाल की उपलब्धियां प्रस्तुत की और अगले दो साल के लिए रूपरेखा बताई। विधायकों ने सरकार के समक्ष अपनी समस्याएं और सुझाव रखे।