गढ़वाली-कुमाउंनी भाषा-बोली के ग्रीष्मकालीन कक्षाओं के शिक्षण सत्र के शिक्षकों का सम्मान

गढ़वाली-कुमाउंनी भाषा-बोली के ग्रीष्मकालीन कक्षाओं के शिक्षण सत्र के शिक्षकों का सम्मान

शिक्षक दिवस के अवसर पर गढ़वाली-कुमाउंंनी भाषा के शिक्षकों का सम्मान

लोक गायक नरेंद्र सिंह नेगी,हीरा सिंह राणा रहे मौजूद
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दिल्ली में उत्तराखंड लोक भाषा साहित्य मंच, उतराखंड एकता मंच एंव डीपीएमआई के तत्वावधान में दिल्ली के कन्स्टीट्यूशन क्लब में शिक्षक दिवस के मौके पर गढ़वाली-कुमाउंनी भाषा-बोली के ग्रीष्मकालीन कक्षाओं के शिक्षण सत्र के शिक्षकों का सम्मान किया गया। इस सम्मान समारोह की विदिवत शुरूआत लोक गयाक गढ़रत्न नरेंद्र नेगी,श्री हीरा सिंह राणा, डॉ. जीत राम भट्ट,सचिव हिन्दी अकादमी एवं संस्कृत अकादमी,बीजेपी के कार्यलय सचिव श्री महेंद्र पाण्डेय, डीपीएमआई के अध्यक्ष डॉ. विनोद बछेती ,डीपीएमआई की मैनेजिंग डारेक्टर श्रीमती पूनम बछेती,एवं डीपीएमआई की प्रधानाचार्य श्रीमती अरूणा सिंह के करकमलों द्वारा दीप प्रज्वलित कर की गई।
कार्यक्रम में पहुँचे अतिथियों एवं गणमान्य लोगों का स्वागत करते हुए डीपीएमआई के अध्यक्ष विनोद बछेती ने कहा कि हम पिछले चार वर्षों से उत्तराखंडी भाषा-बोली की ग्रीष्मकालीन कक्षाओं का आयोजन कर रहे है। हमारे इस प्रयास में दिल्ली-एनसीआर की तमाम सामाजिक संस्थाएं, साहित्यकार और पत्रकार निरंतर सहयोग कर रहे है। यही वजह है कि दिल्ली-एनसीआर में बड़ी संख्या में पहाड़ के बच्चे गढवाली-कुमाउंनी भाषा सीख रहे है बोल रहे है।
श्री बछेती ने कहा कि हमारे इस भाषा अभियान में गैर पहाड़ी समाज के लोग भी जुड़कर गढ़वाली-कुमाउंनी भाषा सीख रहे है। जो हम सब के लिए प्रेरक है। मैं इस अभियान में सहयोग देने के लिए सभी संस्थाओं और सहयोगियों का आभार प्रकट करता हूँ।
शिक्षक दिवस के मौके पर आयोजित इस सम्मान समारोह में उपस्थिति लोगों को संबोधित करते हुए गढ़रत्न नरेंद्र सिंह नेगी ने कहा की जो लोग और जो संस्थाएं अपनी लोक संस्कृति,अपनी लोक भाषा और अपने लोक परिवेश को संरक्षित करने के लिए काम कर रहे है.उन्हें हम सब ने मिलकर थकने नहीं देना है.उन्हें और ऊर्जा प्रदान करनी है.उनकी हौसला अफजाही करनी है.ताकि यह लोगो निरंतर ऐसे ही कार्य करते है.इन सम्मानित लोगों में एक नाम है.डाक्टर विनोद बछेती का है, जो लगातार बिना थके हारे अपनी लोक संस्कृति,लोक भाषा और लोक परिवेश के संरक्षण के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य कर रहे है।इसके लिए मैं विनोद बछेती जी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं और आप सभी से निवेदन करता हूं की आप सभी इस शुभ कार्य में डाक्टर विनोद बछेती और उन तमाम संस्थाओं के साथ खड़े होकर सहयोग करें जो इस तरह से के महत्वपूर्ण कार्य कर रहे है।
कार्यक्रम में विशेष तौर पर पहुंचे लोक गायक हीरा सिंह राणा ने उत्तराखंड लोक भाषा साहित्य मंच, उतराखंड एकता मंच एंव दिल्ली पैरामेडिकल एंड मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट दिल्ली को इस कार्य के लिए बधाई देते हुए कहा कि आप लोगो निश्चित तौर पर बहुत बेहतर कार्यकर रहे है.इस कार्य के लिए मैं समाज सेवक विनोद बछेती को आशीष देता हूं की वह आज के उन युवाओं को अपनी भाषा-बोली सीखा रहे है.जो युवा अपनी भाषा-बोली,संस्कृति से हमेशा दूर रहे है।
शिक्षक सम्मान समारोह में उपस्थिति प्रबुद्धजनों को संबोधित करते हुए हिन्दी अकादमी एवं संस्कृत अकादमी के सचिव जीत राम भट्ट एवं बीजेपी के कार्यलय सचिव श्री महेंद्र पाण्डेय ने सभी सम्मानित शिक्षकों को बधाई देते हुए कहा की यह हम सबके लिए सौभाग्य की बात हैं कि हम अपनी भाषा-बोली के सम्मान के लिए एकत्र हुए है.जिसका श्रेय विनोद बछेती जी और उन तमाम संस्थाओं को जाता है,जिन्होंने इस भागीरथी प्रयास के माध्यम से दिल्ली एनसीआर में पहाड़ के बच्चों और तमाम लोगों को अपनी भाषा-बोली से जोड़ते हुए।उसे सीखने और बोलने के लिए प्रेरित किया।
हिंदी अकादमी एवं संस्कृत अकादमी दिल्ली के सचिव जीत राम भट्ट ने सभागार में उपस्थिति उत्तराखंड के गणमान्य लोग को संबोधित करते हुए कहा कि दिल्ली में बहुत जल्द उत्तराखंडी भाषा-बोली की अकादमी का गठन हो जाएगा। जिससे हमारी भाषा, लेखक और संस्कृति कर्मियों को एक बेहतर मंच मिलेगा।
आपको बता दें की उत्तराखंड लोक भाषा साहित्य मंच, उतराखंड एकता मंच एंव दिल्ली पैरामेडिकल एंड मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट दिल्ली में हर वर्ष उत्तराखंड कई सामाजिक संस्थाओं के साथ मिलकर दिल्ली-एनसीआर में अपनी भाषा-बोली से अपने नौनिहालों को जोड़ने के लिए गढ़वाली-कुमाउंनी कक्षाओं का आयोजन करता है। इस वर्ष इन कक्षाओं का आयोजन 19 मई 2019 से 4 अगस्त 2019 तक किया गया था। जिसमें पहले दिन से ही बड़ी संख्या पहुंचकर गढ़वाली-कुमाउनी साहित्यकारों,बुद्धिजीवियों और बच्चों ने बढ़चढ़ का हिस्सा लिया और अपनी बोली-भाषा सीखकर अपने परिवार को भी अपनी भाषा-बोली बोलने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम में उत्तराखंडी ग्रीष्मकालीन कक्षाओं में गढ़वाली-कुमाउंनी सीखे बच्चों ने अपनी भाषा-बोली में गाने और कविताएं सुनाकर अतिथियों एवं सभागार में उपस्थिति दर्शकों से खूब वाहवाही बटोरी तो मूल रूप से अलवर राजस्थान के रहने वाले ज्ञानचंद जैन ने गढ़वाली में कविता सुनाकर सभी को यह सोचने को मजबूर कर दिया कि जब एक गैर पहाड़ी व्यक्ति इतनी अच्छे से गढ़वाली-कुमाउंनी भाषा-बोली सीख सकता है, तो फिर हम उत्तराखंड के होते हुए अपनी भाषा-बोली क्यों नहीं सीख सकते, बोल सकते?
इस शिक्षक सम्मान के अवसर पर समाज सेवी संजय शर्मा दरमोड़ा,अजय सिंह बिष्ट सहित देश-प्रदेश के कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ कवि दिनेश ध्यानी और गणेश खुगशाल गणि ने किया।