ग्लोबल वर्मिग, पृथ्वी के तापमान बड़ने से बैज्ञानिक चिन्तित।

भानु प्रकाश नेगी।
-ग्लोबल वार्मिग के चलते पृथ्वी के तापमान बड़ने की चिन्ता भू-बैज्ञानिकों के लिए चुनौती बनती जा रही है।भविष्य में इससे होने वाली परेसानियों में जल संकट,और तमाम प्रकार की बीमारियां प्रमुख है। लगातार पर्यावरण असंतुलन के चलते परिस्थितिकी तंत्र में भी बदलाव देखने को मिल रहे है…आने वाले समय मंे इनका क्या प्रभाव रहेगा ।
विश्व भर में जलवायु परिवर्तन का असर अभी से देखने को मिल रहा है…जिसके कारण असमय बारसि,औले गिरना,बेमौसम फल,वर्फबारी आदि सामिल है…इसका असर कृर्षि,स्वास्थ्य आदि पर साफ तौर पर देखने को मिल रहा है। पर्यावरण के जानकारों की माने तो यह मनुष्यों द्वारा अनायास प्रकृति के अत्याधिक दोहन के कारण आने वाली पीड़ीयों को यह त्रासदी झेलनी पड़ सकती है। इसके कारण आने वाली पीड़ीयों को शुद्व हवा,पानी समेत कई तरह की बीमारियां से जुझना पड़ सकता है।

भू-वैज्ञानिकों की माने तो पृथ्वी का तापमान लगातार बड़ता जा रहा है।जिसका प्रमुख कारण तमाम प्रकार का प्रदूषण है।

वही ग्लोबल वर्मिग से पृथ्वी के तापमान बड़ने की बात को मौसम बैज्ञानिक भी स्वीकार कर रहे है लेकिन उत्तराखंड के पर्यावरण में बहुत अधिक बदलाव होने की बात से इनकार कर रहे है।मौसम बैज्ञानिकों के अनुसार उत्तराखंड में पिछले 50 सालों में मौसम मंे ज्यादा परिवर्तन देखने को नहीं मिला है।

-ग्लोबल वार्मिग के कारण विश्व के तापमान में लगातार हो रही बृद्वि बैज्ञानिकों के लिए चुनौती बनी हुई है।ग्लेसियरों के गलने से हिमालय क्षेत्र में बन रही झीलें पर्यावरण की दृष्टी से चिन्ता का सबब बनी हुई है।दिन प्रतिदिन ज्वलंत हो रही इस समस्या पर अभी से गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आने वाले समय मंे काफी गंभीर परिणाम सामने आ सकते है।