उत्तराखण्ड का बहुमूल्य उत्पाद – गेंठी (Dioscorea bulbifera)

उत्तराखण्ड का बहुमूल्य उत्पाद – 47

गेंठी (Dioscorea bulbifera)

गेंठी वैज्ञानिक रूप से ’डायसकोरिया’ परिवार से संबंधित है तथा गेंठी का वैज्ञानिक नाम ’डायसकोरिया बल्वीफेरा’ है। यह औषधीय रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण पौधा है। सामान्यतः गेंठी का उद्भव दक्षिणी एशिया देशों से माना जाता है तथा भारत और चीन में पारंपरिक रूप से इसका उपयोग घेंघा, पेट का कैंसर, सोर थ्रोट व कारसिनोमा में होता है। अनेकों जनजातीय समूह इसका सेवन औषधी के रूप में कच्चे पदार्थ की तरह भिगोकर या ऊबालकर किया जाता है। जिम्बाब्बे, मैडागास्कर जैसी देश में यह पौधा मधुमेह, चर्म रोग, घाव, बवासीर, अतिसार, सूजन आदि के निवारण में प्रयुक्त किया जाता है। कई वैज्ञानिक अध्ययनों में यह माना गया है कि गेंठी में Low Glycemic Index होने के कारण मधुमेह नियत्रण के साथ-साथ मोटापे की रोकथाम में भी सहायक होता है।

संस्कृत भाषा में गेंठी को ’वरही’ कहते है जिसका शाब्दिक अर्थ है ’सुअरों का प्रिय’, भारत के अन्य राज्यों में इसे yam या Air potato के नाम से भी जाना जाता है। भारत के हिमालयी क्षेत्रों में के पर्वतीय इलाकों में यह 1500 से 2200 मी0 की ऊचाई पर बहुतायत पाया जाता है तथा उत्तराखण्ड के पौडी, रूद्रप्रयाग जैसे जिलों में यह प्रचूर मात्रा में पाया जाता है। वर्तमान समय तक भारत में ही इसकी 25 प्रजातियों का उल्लेख पाया गया है।

गेंठी में मुख्य रूप से Furanonorditepenes, Biosbulbin A-H घटक मौजूद होते है, जोकि ऐंटी ट्यूमर घटक होते है। इसके साथ ही गाठों में स्टेराइड पदार्थ पाया जाता है जोकि स्टेराइड हार्मोन, Hormonal Conderaception और सेक्स हार्मोन बनाने में प्रयोग किया जाता है। डायसकोरिया जाति में Diosgenin प्रचुर मात्रा में तथा Estrogen क्रियाओं से भरपूर होते है। निच्छादित Diosgenin व्यावसायिक रूप से Cortisone, Pregnenolone, Progesterone और अन्य स्टेराइड पदार्थ बनाने में प्रयुक्त होता है, जिससे इसकी बाजार माग व व्यवसायिक महत्व अत्यधिक बढ जाता है। पारम्परिक रूप से गेंठी का पेस्ट सूजन, सांप के काटने पर बहुत उपयोगी होता है। गेंठी स्वास्थय के लिए लाभकारी औषधी है इसके पोषक तत्व या खनिजों की उपलब्धता को देखें तो इसमें कार्बोहाइड्रेटस- 22.16%, प्रोटीन- 3.90%, फाइबर- 7.50%, सोडियम- 0.94%, मैग्नीशियम-0.98%, कैल्शियम-0.82%, पोटेशियम- 0.53%, फास्फोरस – 0.38% तक पाये जाते है। इसके पादप घटक Alkaloid, glycosides, steroids, flavonoids, pollyphenol, resin, Tannis है। डाइसकोरिया बल्वीफेरा की जडें जहरीली होती है क्योंकि इनमें Cytotoxic प्रक्रिया होती है। फ्लोरीडा में तो इसे हानिकारक नस्ल घोषित किया गया है, क्योंकि इसकी लतायें जालनुमा संरचना बना देती है, इसके अलावा कई जगह यह जहरीलें स्वभाव की भी होती है।

उत्तराखण्ड में मौजूद असंख्य बहुमूल्य जंगली उत्पादों जिनमें गेंठी भी सम्मिलित है, का विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन व व्यवसायिक उपयोगिता का अध्ययन किया जाना आवश्यक है, जिससे प्रदेश के इस बहुमूल्य उत्पाद को राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर शुद्ध वैज्ञानिक रूप में पहचान मिल सकें तथा प्रदेश के आर्थिकी का साधन भी बनाया जा सकें।

डा0 राजेन्द्र डोभाल
महानिदेशक
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद
उत्तराखण्ड।