सुर्यधार झील के बाद गैरसैंण बहुउद्देशीय झील निर्माण में जुटी राज्य सरकार,झील निर्माण में यूसैक की बड़ी भूमिका

उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र राज्य मैं अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी संबंधी कार्यों के लिए नोडल एजेंसी के रूप में नामित है। वर्ष 2005 में स्थापित इस केंद्र ने सीमित संसाधनों में राज्य की प्राकृतिक संपदा के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और आगे भी इस ओर तीव्र गति से अग्रसर है। जल संरक्षण संवर्धन एवं प्रबंधन के क्षेत्र में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के ड्रीम प्रोजेक्ट जल संसाधन की अंतर्गत उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र द्वारा विगत 3 वर्षों से राज्य के कुमाऊं, गढ़वाल की अनेक छोटी-बड़ी नदियों का उपग्रह आंकड़ों की सहायता से मानचित्र करण फील्ड सर्वेक्षण किया जा रहा है।

पौड़ी जिले के नायार रांदी गाड़, रामगंगा आदि और चमोली के गैरसैंण में प्रस्तावित लगभग 10 जिलों की टैक्टिकल रिपोर्ट तथा अन्य आवश्यक जानकारी संपन्न सिंचाई विभाग को सौंपी हैं इसके अतिरिक्त समय-समय पर प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत भी कई महत्वपूर्ण जानकारियां नदिया व ड्रेनेज मैप इरिगेटेड लैंड मैप कैनाल मैप वह अन्य वांछित सूचना यूसेक द्वारा विभिन्न रेखीय विभागों को उपलब्ध कराई गई है।
इस कड़ी में सीएम रावत ने भराड़ीसैंण व गैरसैंण शहर में पीने के पानी की आपूर्ति के लिए गैरसैंण में रामगंगा पर एक जलाशय का निर्माण करने की घोषणा की थी जिसे ग्रीष्मकालीन राजधानी को दृष्टिगत रखते हुए अगले 50 वर्षों के लिए क्षेत्र के हजारों लोगों के पेयजल आपूर्ति के लिए प्रस्तावित किया गया है। तथा भू-जल पुनर्भरण में भी लाभकारी सिद्ध होगा साथ ही पर्यटन, मत्स्य पालन व रोजगार सृजन आदि जैसे आर्थिक गतिविधियां वह भी बढ़ाने में मदद मिलेगी ।
प्रस्तावित बांध के निर्माण में लगभग 4.95 हेक्टेयर वन पंचायत भूमि का उपयोग किया जाएगा तथा इस पर केंद्र सरकार के जल शक्ति विभाग द्वारा 25 नवंबर 2020 को स्वीकृति के उपरांत राज्य एवं केंद्र के संयुक्त सहयोग से वर्णित योजना का कार्य संपादित किया जाना है।

उक्त परियोजना में भी उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है तथा केंद्र के निदेशक प्रोफ़ेसर एमपी बिष्ट योजना में जियोलॉजिस्ट के नाते निरंतर बांध के निर्माण में आवश्यक सुझाव, मार्गदर्शन सिंचाई विभाग को उपलब्ध करा रहे हैं, जिससे वर्णित परियोजना को समय अंतर्गत पूर्ण किया जा सके तथा क्षेत्र वासियों की पेयजल समस्या का निदान शीघ्र किया जा सके।

प्रदेश की विषम भौगोलिक स्थिति को देखते हुए राज्य में जल संसाधनों का प्रभावी सूचना तंत्र बनाना अत्यंत आवश्यक है जिस हेतु Uttarakhand Antriksh upyog Kendra सरीता प्रोग्राम के अंतर्गत राज्य में स्थित सभी जलग्राही लग रही क्षेत्रों अथवा वेटलैंड की मैपिंग इसरो की तकनीकी सहयोग द्वारा कर रहा है।
राज्य के प्रमुख सहायक नदियां जैसे भागीरथी, अलकनंदा, शारदा, काली गंगा केदार गंगा, घाट गंगा, तिलगाड़ जालंधरी ककोड़ागाड़, सियान गाड़, अस्सीगाड़, भिलंगना, उत्तर गंगा, सरस्वती, ऋषि गंगा खीरगाड़, धौलीगंगा, बिरही गंगा, पातालगंगा, गरुड़ गंगा, नंदाकिनी, पिंडर मंदाकिनी, धौली, गौरी, सरयू, लड़िया नदियां की मैपिंग 1:50000 पैमाने पर यूसेक द्वारा पूर्ण किया गया है। वह इस परियोजना के अंतर्गत राज्य के समस्त जल स्रोतों का डेटाबेस किया जा रहा है जिसके अंतर्गत वर्ष 2005-06 से 2016- 17 के मध्य वेटलैंड जलग्रहण क्षेत्रों में उपग्रह आंकड़ों का तुलनात्मक अध्ययन कर विगत 10 वर्षों में आए बदलाव का मानचित्र करण कर सत्यापन भी किया गया है। विगत 10 वर्षों में जल ग्राही क्षेत्रों मैं 11114 हेक्टेयर क्षेत्रफल में वृद्धि पाई गई है जो राज्य की जल स्रोतों के लिए एक अच्छा संकेत है। उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र द्वारा समय-समय पर राज्य के स्कूल कॉलेज विश्वविद्यालयों रेखीय विभागों के लिए जल संसाधन प्रबंधन संवर्धन एवं प्रबंधन हेतु कार्यशाला, सेमिनार प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रदेश के विभिन्न जनपदों में निरंतर किए जा रहे हैं इससे प्रदेश को सुदृढ़ बनाने में सहायक सिद्ध हो रहा है।