प्रथम विश्वयुद्ध के नायक वीर गबर सिंह की जयंती पर चम्बा में तीन दिवसीय मेला शुरू

प्रथम विश्वयुद्ध के नायक वीर गबर सिंह की जयंती पर चम्बा में तीन दिवसीय मेला शुरू
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समाजसेवी माता मंगला जी एवं श्रीभोलेजी महाराज जी ने किया मेले का उद्घाटन
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केवल 21 वर्ष की आयु में वे मार्च, 1915 के नेव चापेल के युद्ध में हमला बल का हिस्सा बने। उस हमला बल में आधे से ज्यादा सैनिक भारतीय थे और यह पहली बड़ी कार्रवाई थी जब भारतीय सैन्यदल एक इकाई के रूप में ल‌ड़ा था। भारी क्षति के बावजूद वे एक प्रमुख दुश्मन की स्थिति लेने में कामयाब हुए, और इस युद्ध के दौरान उनकी वीरता के कारण ही गबर सिंह नेगी को मरणोपरांत विक्टोरिया क्रॉस पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। आज हम ऐसे शहीद वीर गब्बर सिंह नेगी जी की जन्मभूमि में आकर खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। उक्त विचार समाज सेवी माताश्री मंगला जी ने शहीद वीसी गब्बर सिंह नेगी के शहादत के 104 वर्ष होने पर चम्बा जिला टेहरी गढ़वाल में आयोजित मेले में व्यक्त किए।


श्री देव सुमन रा. इ. कॉलेज चम्बा के प्रागण में आयोजित इस शहीद मेले में पहुंचे माताश्री मंगला जी एवं श्रीभोलेजी महाराज जी ने शहीद गब्बर सिंह नेगी को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि 10 मार्च, 1915 को नेव चापेल में सबसे विशिष्ट बहादुरी के लिए, जर्मन स्थिति पर एक हमले के दौरान, गबर सिंह नेगी बम साथ लिए संगीन से हमला करने वालों का एक हिस्सा थे जो दुश्मन के मुख्य मोर्चे में घुसकर हर बाधाओं को पार करने वाले पहले व्यक्ति थे, जिस कारण दुश्मन पीछे हटकर आखिरकार आत्मसमर्पण के लिए मजबूर हो गया। इस कार्रवाई के दौरान वे वीरगती को प्राप्त हो गए। ऐसे वीर योद्धाओं को हम प्रणाम करते हैं।


माता मंगला जी ने कहा कि हमारी भूमि वीरों की भूमि है। जो हमें गर्व करने के कई मौके देती है। उन्हीं में से आज का दिन भी है कि हम उस वीर सैनिक को याद कर रहे हैं, शहीद गब्बर सिंह नेगी, (विक्टोरिया क्रॉस) को जिनका जन्म आज ही के दिन 1895 में मंज्युड़ गाँव में हुआ था. 1913 में उन्होंने 39वीं गढ़वाल की दूसरी बटालियन में बतौर राइफलमैन ज्वाइन किया. इस बटालियन को प्रथम विश्व युद्ध के दौरान 1915 में फ्रांस के न्यू चेपल इलाके में तैनात किया गया था. उस वक्त वहां जर्मनी का कब्जा था। नेगी ने संगीन की सहायता से खाइयों में छुपे बहुत से जर्मन सैनिकों को मार गिराया और उनकी असाधारण वीरता के कारण जर्मन सैनिकों को हथियार डालने पड़े थे। इस बीच गब्बर सिंह नेगी भी शहीद हो गए। उनकी असाधारण वीरता पर उस वक्त का सर्वोच्च पुरस्कार ‘विक्टोरिया क्रॉस’ मरणोपरांत दिया गया।


माताश्री मंगला जी एवं श्रीभोलेजी महाराज ने इस आयोजन के लिए शहीद वीसी गब्बर सिंह नेगी मेला समिति टिहरी गढ़वाल के सभी सदस्यों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि हम आज खुद को सम्मानित महसूस कर रहे हैं कि आप के सौजन्य से हमे इस मंच पर आने का मौका मिला। माता मंगला जी ने कहा कि इस वीर भूमि के लिए हमें जो भी सेवा करने का मौका मिलेगा हम अपनी संस्था हंस फाउंडेशन के तत्वावधान में जरूर करना चाहेंगे।


श्री देव सुमन रा. इ. कॉलेज चम्बा के प्रागण में आयोजित शहीद गब्बर सिंह नेगी जयंती के अवसर पर गढ़वाल राइफल्स का दस्ता भी लैंसडाउन,पौड़ी गढ़वाल से आकर अधिकारिक तौर पर शामिल हुआ एवं गढ़वाल राइफल रेजीमेंट सेंटर के जवानों, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने शहीद का स्मरण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। गढ़वाल राइफल के बैंड ने मधुर धुन के बीच रितलिंग परेड कर वीर गबर सिंह के स्मारक पर पुष्प चक्र अर्पित किया।
इस मौके पर विभिन्न जनप्रतिनिधियों और गांवों से आए लोगों ने स्मारक स्थल पर शहीद को याद किया। इस मौके पर समिति के अध्यक्ष इंद्र सिंह नेगी, संयोजक रघुभाई जड़धारी, सभासद सदस्य शक्ति प्रसाद जोशी, सदस्य संजय बहुगुणा कोषाध्यक्ष आनंद सिंह नेगी पालिकाध्यक्ष सुमन रमोला अधिशासी अधिकारी एसपी जोशी बीजेपी नेता वीर सिंह पंवार एवं सांस्कृतिक सचिव रवि गुसाई आदि मौजूद थे।