भारत की शिक्षा नीति को विश्व स्तर पर सराहना मिलने पर महामहिम भी गदगद

 

भारत की शिक्षा नीति को विश्व स्तर पर सराहना मिलने पर महामहिम भी गदगद

शैक्षिक उन्नयन के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री डाॅ.निशंक को राष्ट्रपति ने दी बधाई

देहरादूनः भारत की नई शिक्षा नीति देश ही नहीं, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी लोकप्रिय हो रही है। अनेक देश इसे अपने यहां भी लागू करने की योजना बना रहे हंै। यह पहली ऐसी शिक्षा नीति है, जिसके लिए व्यापक स्तर पर छात्रों, अध्यापकों, जनप्रतिनिधयों, विशेषज्ञों और विद्वानों के सुझाव आए हैं। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इसकी सराहना,लोकप्रियता और चर्चा पर भारत के राष्ट्रपति ने भी प्रसन्नता जाहिर कर इसके लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री डाॅ. रमेश पोखरियाल निशंक को बधाई दी है। उन्होंने साहित्यिक क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए ’वातायन’ अंतर्राष्ट्रीय शिखर सम्मान दिए जाने पर भी डाॅ. निशंक को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्र के उत्थान के लिए किया जा रहा आपका यह कार्य नितांत प्रशंसनीय है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 भारतीयता का दस्तावेज है। इसमें शिक्षा के क्षेत्र में आमूल-चूल परिवर्तन किए गए हैं। नैतिक, मानवीय मूल्यों, भारतीय संस्कृति और आत्मनिर्भरता की आधारशिला पर निर्मित इस नीति में विद्यार्थी को विश्वमानव और भारत को विश्व गुरु बनाने की संकल्पना निहित है। भारत को ज्ञान के रूप में इस प्रकार विकसित किया जाएगा कि विदेश से भी विद्यार्थी यहां ज्ञानार्जन के लिए आएंगे। भारतीय भाषाओं के संरक्षण और विद्यार्थी के समय का सदुपयोग इस नीति की कतिपय विशेषताएं हैं। इसकी खूबियां अनेक देशों में चर्चा का विषय बन गयी हैं। इसकी वैश्विक स्तर पर सराहना हो रही है। इसलिए अनेक देश इसे अपने यहां लागू करने की सोच रहे हैं। नई शिक्षा नीति में निहित अनेक सुधारों के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री डांॅ. रमेश पोखरिया निशंक को हाल ही में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय द्वारा सम्मानित किया जा चुका है।
भाारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने केंद्रीय शिक्षाक्षा मंत्री डाॅ. रमेश पोखरियाल निशंक को पत्र भेज विश्वस्तर पर हो रही भारत की नई शिक्षा नीति की प्रशंसा पर प्रसन्नता जाहिर की है। राष्ट्रपति ने कहा कि यह हमारे लिए गौरव की बात की है। महामहिम रामनाथ कोविन्द ने डाॅ. निशंक को लिखे पत्र में कहा कि आपके द्वारा राष्ट्रहित में किया जा रहा शैक्षिक उन्नयन सराहनीय है।