सरकारी डॉक्टरों ने काली पट्टी बांधकर जताया विरोध।


            -भानु प्रकाश नेगी,देहरादून
सरकार व स्वाथ्य विभाग की ओर से लंबित मांगों पर सकारात्मक विचार न होने पर डॉक्टरों ने काली पट्टी बांध कर विरोध जताया। प्रांतीय चिकित्सा संध के अध्यक्ष डॉ. डी पी जोशी ने बताया कि अभी विरोध के लिए काली पट्टी बांॅधी गई है।हडताल की नौबत नही आई है ताकि मरीजों को परेसानियों न हो डीएसीपी का मुख्य मुद्दा था जिस पर सरकार ने बहुत शर्त लगाई थी। लम्बे समय से लम्बित मांगों को लेकिर चिकित्सा सचिव से वार्ता चल रही थी जिसका निर्णय सामने नही आ सका।मुख्य मागों में डॉक्टर जिनका चयन सरकार द्वारा किया जाता है वे पीजी करने यूपी जाते है उनका पजीकरण यहां पर नही हो पा रहा है।प्रांतीय चिकित्सा संध के महासचिव का ट्रांसफर शैया चकराता से चमोली कर दिया गया है जिसके कारण एसोसिएसन के लोगों में काफी नारजगी है। काली पटटी का विरोध एक सप्ताह तक रहेगा। अगर सरकार का निर्णय सकारात्मक नही रहता है तो आगे की रणनीति तय कि जायेगी।


काली पट्टी का विरोध नियमों के उलट
सूत्रों की माने तो डॉक्टरों का यह विरोध नियमों के विरोध में है। संध की प्रथम मांग महासचिव का ट्रांसफर मुख्यालय(देहरादून)में न कर चमोली कर दिया गया है लेकिन जब महासचिव साहब शैया में तैनात थे तब उनके ट्रांसफर के लिए संध के द्वारा कोई प्रयास नही किया गया था, नही ही शासन को इस बारे में कोई लिखित पत्र (संध के लेटर पैड पर) दिया गया और जब उन्हें शैया से चमोली तैनात किया गया है तब संध विरोध करने लगा है। दूसरा काली पट्टी बांधकर विरोध जताना भी नियम के विरूध है क्यों कि नियमानुसार शासन को 15 दिन पहले सूचना दी जाती है,जो एक मान्यता प्राप्त संध की नियमावली में होता है।
पदाधिकारी खो चुके है सदस्यों का समर्थन
गौरतलब है कि चिकित्सा संध ने लगभग ढेड साल तक पूरी ताकत लगा कर अध्यक्ष को पौड़ी से देहरादून में तैनात कराया।महासचिव को शैया से देहरादून लाने के लिए कुछ-कुछ प्रयास तो नही कर नही पाये और अब चमोली से देहरादून लाने की असंबैधानिक मांग की जा रही है। सूत्रों की माने तो संध का डॉक्टरों की मूलभूत समस्याओं से कोई लेना देना ही नही है। संध का दुप्रयोग पदाधिकारी प्रदेश में अपनी सही जगह पर तैनाती व अपना उल्लू सीधा करने में करते है।संध के पदाधिकारी सदस्यों का समर्थन खो चूके है पाच सात माह के शेष कार्य काल में डॉक्टरों के हित के कार्यो के बजाय उलूल जलूल के कार्यो में अपना समय नष्ट कर रहे है।कई डॉक्टरों का कहना है कि सध के पदाधिकारी लिखित रूप से कार्यकारणी की मीटिंग तक नही बुलाते है।शासन द्वारा संध के नियमों का अनुसरण नही किया जाता है। लिखित रूप से कोई नोटिस नही दिया जाता है।