डॉ. रमोला ने का कमाल, ढाई साल की बच्ची के आंख की जन्मजात बीमारी का किया सफल ऑपरेसन

देहरादून- अगर इरादे नेक हो और काम करने के प्रति सच्ची निष्ठा व लगन हो तो कम संसाधनों में भी जटिल से जटिल कार्य किये जा सकते है।जो ऑपरेसन प्रदेश बडे आंॅखों के अस्पताल नही कर पाये उसे गांधी शताब्दी नेत्र चिकित्सालय जिला अस्पताल भाग दो के सीएमएस व वरिष्ठ नेत्र सर्जन डॉ. रमोला की टीम ने सफलता पूर्वक कर दिखाया।

डॉ रमोला ने बताया कि यह बच्ची बहुत गरीब घर की थी जिसको नेत्रों का पैदाईसी विकार था,उसके माता पिता कई बडे अस्पतालों में उसके ऑपरेसन के लिए गये लेकिन उसका कही भी ऑपरेसन नही हो पाया। हंस फॉउडेसन के माध्यम से वह गांधी नेत्र चिकित्सालय में आयी,उसका बेहोस करके ऑंख का सफल ऑपरेसन किया गया। इस ऑपरेसन में डॉ. संजीव कटारिया और डॉ. अभिलाषा कोहली का अहम योगदान रहा जिन्होंने बच्ची ऑपरेसन के लिए बेहास करने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।यह गांधी अस्पताल का पहला केस था जो सफल रहा।यह ऑपरेसन इसलिए खास है कि छोटे बच्चों को बेहोस कर ऑपरेसन करने के लिए डॉ. जल्दी से तैयार नही होते है,उसके लिए बडे सेटअप की डिमांड की जाती है,लेकिन हमने यह साबित कर दिखाया कि यह काम छोटे सेटअप में भी हो सकता है।

वही डॉं. संजीव कटारिया का कहना है कि इस तरह के केसों में रिस्क तो होता है,लेकिन बच्ची के ऑंख का ऑपरेसन भी जरूरी था। क्योंकि बच्ची बहुत गरीब परिवार से थी उसके मां बाप बडे अस्पताल में उसका इलाज कराने में असमर्थ थे,इसलिए यह ऑपरेसन होना जरूरी था गांधी नेत्र चिकित्सालय का यह पहला केस था आगे भी हम अपनी सेवा जारी रखने के लिए प्रतिबध है।
सफल ऑपरेसन के बाद बच्ची के मां बाप काफी खुश नजर आये उन्होंने हंस फाउडेसन और गांधी नेत्र चिकित्सालय के सभी डॉक्टरों का धन्यवाद किया,बच्ची के पिता ने कहा कि अगर डॉ रमोला इस ऑपरेसन के लिए मना कर देते तो हम अपनी बच्ची के आंखों को खो देते।
भानु प्रकाश नेगी,देहरादून