डॉ. एन.एस. बिष्ट की सूझ-बूझ से कैसे बची अन्तिम सांस लेती महिला की जान. जाने इस खास रिपोर्ट में!

कोरोनशन अस्पताल के बरिष्ठ फिजिसीयन,एमडी मेडिसिन डॉ.एन.एस.बिष्ट की समझदारी से बची रोशनी देवी की जान
         //भानु प्रकाश नेगी//

देहरादूनःआनंन्द चौक टिहरी गढवाल निवास रोशनी देवी(50)पीलिया पीडित जब मरणासन्न अवस्था में राजकीय दून मेडिकल कॉलेज से कोरोनेशन अस्पताल पंहुची तो उसके परिजनो ने उसके बचने की उम्मीद छोड़ दी थी।पहले कोरोनेसन अस्पताल के डॉक्टरों को भी इनके रोग के मर्ज कोई दवा नही सूझी स्टॉफ सहित डॉक्टरों ने हाथ खडे कर दिये थे। लेकिन डॉक्टर एन बिष्ट की सूझ बूझ से मरीज की जान बच गई।



कोरोनेशन अस्पताल के बरिष्ठ फिजिसियन व एम.डी मडिसिन डॉ. एन.एस.बिष्ट ने बताया कि मरीज यहां इमरजेसी में आया था तब बेहोशी की हालत में थी लगता था कि एक रात भी मुस्किल से बच पायेगा। मरीज को पीलीया,बुखार,शरीर में दर्द,फेफडे व पेट में पानी भरा था मरीज के शरीर के चार से ज्यादा अंग फेल हो चुके थे। कोरोनेसन अस्पताल में आईसीयू नही है,मरीज की हालत काफी दयनीय थी जिसे अन्य जगह नही भेजा जा सकता था, क्यांकि इनके पास इलाज के लिए धन नही था।पहले दिन हमने मरीज को आक्सीजन और अन्य सपोट लगाकर रख दिया दुसरी शुबह जब मैने मरीज को कुछ ठीक हालत में देखा तो फिर मैने इनका दुबारा इसी अस्पताल से जांच करवायी शांम तक आयी रिर्पाट में मरीज का पीलिया काफी बडा हुआ था लेकिन हेपिटाईटिस ज्यादा नही था।

फिर मुझे अपने कलकत्ता में अपने देखे हुऐ अनुभवों का स्मरण हुआ जिसमें इस तरह के रोग हो जाते है लेक्टोपाईरेसिस नाम के जो रेट यूरिन,डॉग यूरिन से खेतों में काम करने वाले किसानों को हो जाता है। तक मैने इन्हें एक साधारण इन्जेक्सन लगाया यह बीमारी लेक्टोपाईरेसिस बैक्टीरियास से होती है। मैने इनका इलाज करना शुरू किया और मरीज धीरे-धीरे ठीक होने लगा दूसरे तीसरे दिन से मरीज खाने-पीने लगा और अब तेजी से रिकवर होने लगा है।मैने यह बात मरीज के परिजनो के साथ शेयर की मेरा मानना है कि ना उम्मीदी के बक्त हमें एक पल के लिए अलग सोचना चाहिए ताकि लाचार गरीब मरीजों की जान बचाई जा सके।