रंग लाई डाॅ.हरीश घिल्डियाल की मेहनत,लगातार 7 घंटे आॅपरेशन के बाद जोड़ी कटी अंगुली।

//भानु प्रकाश नेगी//

-7 घंटे के अनूठे आपरेशन से कैलाश अस्पताल देहरादून के डाक्टरों ने जोड़ी बच्चे की कटी उंगली ।

-माईक्रोसर्जरी में नये नये मुकाम हासिल कर रहे है डाॅ. घिल्डियाल।

-शरीर को कटे अंगों को जोडने में महारथ हासिल है कर चुके है डाॅ . घिल्डियाल।

विकट भौगोंलिक परिस्थिति वाले प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं हालत कितनी गंभीर है यह बात किसी से छिपी नहीं है। यदि किसी व्यक्ति का शरीर का अंग किसी दुर्धटना में कट जाय या जल जाय तो उसे प्रदेश से  बाहर जाकर इलाज करना पढता था। क्योंकि कटे अंगों को जोडने के लिए नियत समय और बहुत सावधानी की जरूरत होती है इसलिए 90 प्रतिसत से ज्यादा मामलों में मरीज अपंग हो जाता था ।क्योंकि सही समय पर उपचार ही नही हो पाता था। लेकिन कैलास अस्पताल के प्लास्टिक एवं काॅस्मेटिक सर्जन डाॅ. हरीश घिल्डियाल ने अपने लम्बे अनुभवों और मानवता की जिन्दा दिली से कटे अंगों का अंसभव इलाज भी संभव कर दिखाया है ।हाॅल की एक घटना इसकी जीती जागती मिसाल है।

घटना 18 मई शाम 7 बजे की है जब 8 वर्षीय शौर्य चारा काटने की मशीन के साथ खेल रहा था तभी अचानक उसकी दाएँ हाथ की तर्जनी उंगली मशीन में आकर पूरी कट गई। शौर्य की मां ने बताया की जब वह घटना स्थल पर पहुँची तो शौर्य के हाथ से खून बह रहा था और कटी उंगली नीचे पड़ी थी। शौर्य को पहले ऋषिकेश के निर्मल आश्रम फिर देहरादून के जालीग्रांट अस्पताल और फिर रात 9ः30 बजे कैलाश अस्पताल देहरादून लाया गया।


कैलाश अस्पताल में उन्हें वरिष्ठ प्लास्टिक सर्जन डाक्टर हरीश घिल्डियाल तथा एनेस्थिसियोलाजिस्ट डाक्टर कनिका अरोड़ा द्वारा उनका निरिक्षण किया गया। उंगली जोड़ने की सर्जिकल प्रक्रिया (रिप्लांटेशन) रात 10ः30 बजे शुरू हुई जो सफलतापूर्वक सुबह 5ः30 बजे सम्पन्न हुई।


डाक्टर हरीश घिल्डियाल ने बताया कि यह केस बहुत चुनौतीपूर्ण था क्योंकि एक तो बच्चे की उंगली का आकार कम उम्र के कारण छोटा था और दूसरे उसकी उंगली काफी आगे से कटने की वजह से जोडी जाने वाली खून की नाड़ियों का व्यास 0.5 mm से भी कम हो जाता है जिसे सफलतापूर्वक जोड़ना बहुत ही चनौतीपूर्ण था। उन्होंने बताया की एक अनुभवी माइक्रोसर्जन कई घंटे आपरेटिव माइक्रोस्कोप के नीचे विशेष प्रकार के माइक्रो उपकरणों की सहायता से इन कटे अंगों को जोड़ने का कार्य सम्पन्न करता है,पंरतु अंतिम परिणाम माइक्रोसर्जन की सारी थकान खत्म कर देते हैं।


डा0 हरीश घिल्डियाल ने बताया की अभिभावकों को बच्चों के साथ सर्तकता बरतनी चाहिए। खेतों में चारा काटने की मशीन से हुए अंग-विच्छेद आम है लेकिन माइक्रोसर्जरी के बारे में जागरूकता तथा नवीनतम तकनीक से एसे मरीजों को नई जिंदगी मिल रही हैं।

डा0 हरीश घिल्डियाल ने जानकारी देते हुए बताया की अंग-विच्छेद होने पर कटे अंग को साफ कपड़े में लपेट कर एक प्लास्टिक बैग में डाल कर सील कर देना चाहिए फिर इसको एक आइस-बाक्स में डालकर तुरंत नजदीक के अस्पताल पहुॅुचना चाहिए। शौर्य की उंगली में सर्जरी के 14 दिन बाद खून का दौरा बिल्कुल सामान्य है तथा वह 3-4 महीने में पहले की तरह सामान्य कार्य करने लगेगा, डा0 हरीश घिल्डियाल ने जानकारी दी।

प्रेस वार्ता में कैलाश अस्पताल की ग्रुप डायरेक्टर डा0 रितु वोहरा, कैलाश अस्पताल देहरादून के डायरेक्टर पवन शर्मा तथा चिकित्सा अधीक्षक डा0 एस0 के0 मिश्रा उपस्थित रहे।