जल्द लौटेगी फिर दून की चाय की महक

कभी स्वास्थ्य,महक,व ताजगी के लिए देश और दुनियों में मसहूर देहरादून की चाय को एक बार फिर से जिन्दा करने के प्रयास डी टी सी इंडिया लिमेटेड द्वारा किये जा रहे है,जिसके लिए लगभग 30 हजार पौधों को खुद की नर्सरी तैयार किया गया है और 15 हजार पौधों को आसाम के सिलगुडी से मंगाया गया है।
कभी हरियाली व स्वास्थ्य वर्धक जलवायु के लिए मसहूर देहरादून में विकास की अंधी दौड में कंक्रीट के जंगल उग आये है। पुराने समय में चाय के लिए मसहूर देहरादून में अब चाय के बागान सिर्फ नाम के लिए ही बचे हुए है।इन चाय के बागानों का एक बार फिर से हराभरा करने और देहरादून की पुरानी पहचान को जिन्दा करने के लिए डीटीसी इंडिया लिमिटेड एक बार फिर से अथक प्रयासों में जुटा हुआ है। डायेरक्टर डी के सिंह का कहना है कि कभी देहरादून में बहुत स्थानों पर चाय के बागान हुआ करते थे जो अब काॅलोनियों का आकार ले चुके है।चाय बागानों जिन्दा करने के लिए इस बार आसाम के सिलागुडी से 15 हजार पौधे चाय के मंगाये गये है।

देहरादून की पहचान कभी यहां की यहां उगने वाली हर्बल चाय से होती थी। जिसे देश व विदेशों में खुब पंसद किया जाता था, लेकिन समय के साथ साथ आवादी बढने से यहां की चाय अपना अस्थित्व खाने लगी और फिर बाजारों से गायब ही हो गई लेकिन वर्तमान समय में इसे फिर से पुराने स्वरूप में लाने का अथक प्रयास किया जा रहा है जिसमें डीटीसी इंडिया लिमिटेड लगातार प्रयास कर रही है। यहां के मनैजर राजेन्द्र डिमरी का कहना है कि यहां की चाय बिट्रिस काल में पूरी तरह से निर्यात की जाती थी ये चाय स्वास्थ्य वर्धक के साथ साथ इम्युनटी बुस्टर का काम भी करती है।

अपने पुराने स्वरूप को खो चुकी देहरादून की मसहूर चायपत्ती को एक बार फिर से पुराने स्वरूप में लौटाने का अथक प्रयास डीटीसी इंडिया लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है। जिसके लिए कम्पनी द्वारा 15 हजार पौधा का रोपण की तैयारियां की जा चुकी है।इसके साथ ही कम्पनी ने 30 हजारों पौधों को नर्सरी में तैयार किया है जो एक साल के बाद रोपने को तैयार हो जायेगी। कम्पनी का प्रयास अगर सफल रहा तो एक बार फिर से देहरादून की चाय देश और दुनियां में अपना पुराना स्वरूप पाने में सफल हो जायेगी।जरूरत इस बात की है राज्य सरकार को भी इसकी इस ओर ध्यान देना होगा तभी देहरादून की चाय को नई जिन्दगी मिल पायेगी।


-Bhanu Prakash Negi