सुण उत्तराखण्ड का रजा दरिंदों तें होंई- चेंदी फाँसी की सजा…. युवा कवि दीपक कैन्तुरा की पापी दरिन्दों पर ये खास कविता।

देवभूमि की कैमा लगोण खैर

गंगा-जमुना का मैत ह्वेगी अंधेर

भैर का भित्तर बसीगी –भित्तर का बसी गी भैर

माँ नंदा का मैत देवतों का कोणेठा ह्वेगी अंधेर

सुण उत्तराखण्ड का रजा

दरिंदों तें होंई- चेंदी फाँसी की सजा

हरी- भरी- डांडी काठ्यों मा बैरी बिष घोलण लेगी

देवभूमि की देवियों पर क्या अन्यो ह्वेगी

कैपर कन भरोंसू कैमा छ्वींणीन बाला यखुली

दरिंदों का हाथ लगणी देवभूमि की नोनी ब्यकुली

जों घरों मा कभी लगदा नी था ताला

आज द्वार लगैक भी सुरक्षित नीछन बाला

सुण मेरा उत्तराखण्ड का रजा

युं दरिदों तें देदी फाँसी की सजा.

यूं दरिदों तें नखरु गीज पडडी गी

कति नी बोलादी बे कसुर नोनी यूं दरिदों का हाथ चढ़ी गी

देवभूमि मा नोनी कु होण क्या ह्वेगी अब पाप

जनि घर मा नोनी होंदी त घबराण लगी जादा माँ बाप

द्विदिन हमा खूब जोश रेंदू

तीसरा दिन ह्वे जांदन चुप चाप

सुण मेरा उत्तराखण्ड का रजा

दरिदों तें होंई चेंदी फांसी की सजा

यनमा कनक्वे बेटी बचली बेटी पडली

जब यनि मासूम दरिंदों का भेंट चढ़ली

यूं तें गीज पडगी की रोज मांगी देंदा माफी

 देवभूमि मा मजदूरों का रुप मा पहुंचीगी पापी

कनि दरिदों न मारी ब्याली माँ- बापों  उत्तरकाशी भडकगों माँ

बापों की लाटी

पापियोंन  दुष्कर्म कै तें गळू दिनी काटी

योंत रोज- रोज निरा- निरी गीज पढीगी

तब तक नी सुधीनीया यी जब तक द्विचार सूळी पर नी चढीगी

सुण उत्तराखण्ड का रजा

दरिंदों तें होंई चेंदी फाँसी की सजा

अखबार टीवी रेडियो सोशल मीडिया पर यनि खबर ओणी च

जो घरों मा लोग रात हिटदा बैठदा था आज वख दिन मा भी डैर होणी च

कैन रचि साजिश देवभूमि तें कर दिया बदनाम

यनू सुणिक धण- मण रोणा चारों धाम

देवभूमि का द्यबतों सुणा मेरी पुकार

यूं दरिदों कु करि द्या संघार

सुण उत्तराखण्ड का रजा

दरिदों तें होंई चेंदी फाँसी- की सजा

देवभूमि का मनख्यों करिदिया तुम पापियों सी निपटणे की तैयारी

कभी पौडी ब्याली उत्तरकाशी ह्वे भौल कै हेककी भी ए सकदी बारी

माँ द्रोपति कु हाथ मा कटार गेण पडलू

अब हर दीदी भुली तें तिलू रोंतेली बेण पडलू

देवभूमि का मनखी अपणु साहस दिखे द्या

देवभूमि कु स्वाभीमान बचैक दरिदों तें सबक सिखे द्या

सुण उत्तराखण्ड का रजा

दरिदों तें होई चेंदी फाँसी की सजा

देवभूमि मा दरिदों कु ह्वेगी राज

कु बचोलू देवभूमि की बेटियों की लाज
व्यापारियों का भेष मा कना च राज
खतरा मा. च देवभूमि की लाज
सुण उत्तराखण्ड का रजा
दरिंदों. तें. होंई. चेंदी फांसी. की सजा

नोंउ बदलिक व्यापार कना च
व्यापारी की आड मा मां बेण्यों पर अत्याचार. कना च
द्वि रुपया. का लालच मा. हम. योंते. किरायादार. धना च
यी मानव. रुप मा. दानव. जनु काम. कना च
ये अत्याचार सी. नीपटणक तैयार ह्वे जा मेरा रजा
देवभूमि की पुकार दरिंदों तें. होंई चेंदी फांसी की सजा
जागी जावा. उत्तराखण्डीयों जागी जावा.