देहरादून का एक ऐतिहासिक स्कूल पर बंद होने की कगार पर

कभी देहरादून की शान माने जाने वाले एतिहासिक स्कूल गोरखा मिलट्री इंटर काॅलेज लीज एग्रीमेंट खत्म होने के कारण बंद होने की कागर पर पंहुच गया है। स्कूल प्रसाशन द्वारा की गई कार्यवाही के बाद मामला अभी कोर्ट के विचारधीन है।

 जब कभी देहरादून में सिर्फ तीन या चार स्कूल हुआ करते थे तब गोरखा मिलेट्री स्कूली भी इनमें से एक हुआ करती थी।1925 में स्थापित और 1927 से सरकार द्वारा लीज पर दिये गये इस स्कूल के किराये का एग्रीमेंट  अब खत्म हो गया है।इस स्कूल के पूर्व छात्र कर्नल सी बी थापा का कहना है कि 180 रूपये सालाना फीस बाले इस स्कूल को 21महीने का किराया एक करोड़ 59 लाख 63हजार का नोटिस जारी किया गया है जिससे यह स्कूल अब बंद होने की कगार पर है।

वर्तमान समय में भी इस स्कूल में लगभग 40 बच्चे अध्ययनरत है जिनके भविष्य पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैै। गोरखा मिलेट्री स्कूल उन एतिहासिक स्कूलों में एक है जिसने महाबीर चक्र बिजेता जसवन्त सिंह को शिक्षा दी थी। कर्नल सी बी थापा बताते है कि यह स्कूल पहले प्रायमरी फिर हायरसेकेण्डरी,और फिर इंटर काॅलेज में तब्दील हुआ मेजर शहीद दुर्गा मल्ल जिन्होंने आजाद हिन्द फौज ज्वाईन कर अपनी शहादत दी थी वह भी इसी स्कूल के पढे हुऐ थै इसके साथ ही जनरल राम प्रसाद,लेफटीनेन्ट जनरल फुटबाल खिलाडी स्याम थापा,अमर बहादूूर थापा,नर बहादूर थापा समेत बेस्ट बाक्सर पद्म बहादूर मल्ल जैसी कई हस्तीयों इस स्कूल की पैदाईस है।

गोरखा मिलेट्री इंटर काॅलेज काॅलेज पर भारी किराये की राशि चुकाने का संकट पैदा हो गया है। जिससे अब यह एतिहासिक स्कूल बंद होने की कगार पर पंहुच गया है,राज्य सरकार के साथ साथ स्कूल प्रंबधन व गोरखा समाज इसे बचाने के लिए भरसक प्रयास तो कर रहा है। लेकिन देखने वाली बात यह होगी कि कोर्ट का फैसला किसके हित मे आता है।

-भानु प्रकाश नेगी ,देहरादून