प्रभु चिन्तन से होती है मन की शांन्ति-आचार्य आशीष गौड़।

प्रभु के चिन्तन और मनन से मन को शांन्ति की मिलती है। आज के तनाव भरी जीवन शैली मै आध्यात्मिक विचार,प्रभु का स्मरण,श्रीमद् भागवत पुराण आदि कथाओं के श्रवण से इन्सान सद्मार्ग मिलता है । यह विचार सुप्रसिद्व कथा वाचक आचार्य आशीष गौड़ ने रायपुर स्थित काली माता मंदिर में श्रीमद् भागवत कथा के दौरान कही।
उन्होने कहा कि भारत में उत्तराखंड सम्पूर्ण धाम है जहां आदि अनादि काल से देवी- देवताओं  और महान ऋषि तपस्वियो का  निवास स्थान है।श्रीमद् भागवत महापुराण मनुष्य को सही मार्ग पर ले जाने का सम्पूर्ण ज्ञान है।मनुष्य को अपने जीवन मे  बार बार इस कथा का श्रवण करना चाहिए ताकि वह सच्चे मार्ग से भटक न सकें।


कथा में विशेष आमत्रंण पर टिहरी जौनपुर लालूर पट्टी के म्याणी गांव से पंहुची नागदेवता की डोली का भब्य स्वागत किया गया।इस दौरान भक्तों द्वारा नागदेवता की डोली को नृत्य भी कराया गया। दूर दराज से कथा में पंहुचे भक्त नागदेवता की डोली के साथ जमकर थिरके जिससे माहौल में भक्ती रस घुल गया।दूसरे दिन प्रात:काल विशेष पूजा अर्चना के बाद देवडोली को नृत्य कराया गया तत्पश्यचात नागदेवता की डोली को गंतब्य स्थान के लिए विदा किया गया।


म्याणी गांव नागदेवता की डोली के साथ आये भक्तों में शरणी मल,संतराम पंवार,लाखी राम राणा,राजेश सजवाण,गजे सिंह रमोला,जयेन्द्र रमोला,पृथ्वीपाल सिंह थलवाल,मेहर सिंह चौहान,बिरेन्द्र मतयाल,बिक्रम रावत, रधुवीर रमोला,रणवीर रावत,राकेश रमोला,रविन्द्र रमोला,धीरज रावत,सुनील कैन्तुरा,बिजेन्द्र थलवाल,दीपक रावत,दीपक कैन्तुरा,संजीव पंवार,अंकित पंवार,भरत सजवाण,देवेन्द्र रमोला,अनूप चौहान,रजत पंवार,रोहित रमोला,मनवीर पंवार,सुभम रमोला,सचिन रमोला,मोहनदास,सुमनदास गोपल आदि लोग मौजूद रहे।

                       -भानु प्रकाश नेगी