डायरिया मुक्ति से रूकगें 10 प्रतिसत शिशु मृत्यु दर-डॉ एल.सी. पुनेठा

राज्य सरकार स्वास्थ्य विभाग द्वारा आयोजित डायिरिया रोकथाम पखवाडे की शुरवात शुक्रवार एक सर्वे चौक स्थित एक सभागार में स्वास्थ्य विभाग के आला आधिकारियों के सानिध्य में की गई। कार्यक्रम में डायरिया से मुक्त उत्तराखंड पर जोर दिया गया जिसमें आंगनबाडी एवं आशा कार्यकर्तीयों को इस महत्वपूर्ण कार्य की जिम्मेदारी दी गई है।


कार्यक्रम मेंं कोरोनेसन अस्पताल के सीएमएस सीनियर सर्जन डॉ एल सी पुनेठा का कहना है कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य डायरिया से होने वाली 10 प्रतिसत मृत्यु दर में सत प्रतिसत कमी लाना है। कार्यक्रम का मुख्य जिम्मेदारी प्रसिक्षित आशा व आंगनबाड़ी कार्यकर्तीयां पर है क्यांकि इनका संबध सीधे तौर पर गांव गांव के घर धर से होता है। डायरिया की श्रेणी में उन बच्चां को लिया गया है जिन्हें एक दिन में तीन बार से ज्यादा दस्त हो रहे हो। आंगनबाडी और आशाओं के माध्यम से बच्चों को प्राथमिक उपचार के तौर पर ओआरएस का घोल व जिंक की गोली दी जाती है। जिससे शिशु के शरीर में लवण व पानी की कमी न हो।अगर दस्त के साथ उल्टी,बुखार व दस्त में खून भी आ रहा हो तो नजदीकी स्वास्थ्य केन्ंद्र में जाकर डॉक्टरी सलाह पर उपचार शुरू किया जा सकता है जिससे डायरिया की पूर्ण रोकथाम की जा सकती है।


सीएमओं डॉ. एस.के गुप्ता का कहना है कि कार्यक्रम का उद्देश्य एक से पांच साल तक के बच्चों में होने वाले डायरिया से मुक्ति पाना है । यह कार्यक्रम प्रसिक्षत आशा व आंगनबाड़ी कार्यकतियों के माध्यम से प्रदेश के घर घर में जागरूकता फैलाई जा रही है साथ ही प्राथमिक उपचार के तौर पर ओ आर एस की घोल व जिंक की गोलियों भी बंटी जायेगी।


वही गांधी नेत्र चिकित्सालय जिला अस्पताल भाग दो के सीएमएस सीनियर नेत्र सर्जन डॉ बी सी रमोला का कहना है कि डायरिया से किसी की मृत्यु हो ही ना इसके लिए आंगनबाडी एवं आशा कार्यकर्तीयों को प्रसिक्षत कर दूर दराज के ग्रामीण अंचलों में स्वास्थ्य विभाग द्वारा भेजा जा रहा है।डायरिया से रोकथाम के लिए उचित आहार,स्वच्छता व शुद्व वातावरण,व प्रसनल हाईजीन का ध्यान रखा जाना आवश्यक है। साथ ही पानी का साफ होना अति आवश्यक है। बच्चों को हाथ धूलकर भोजन व दूध पिलाना और गंदगी से बचे रहने से डायरिया का खतरा काफी हद तक कम हो जाता


है।

प्रदेश में मातृ शिशु मृत्यदर का आंकड़ा बहुत ठीक ठाक न होने के कारण डायरियां और अन्य रोगों पर राज्य सरकार ने 28 सितम्बर से 15 दिन का डायरिया पखवाडा आयोजित किया है। लेकिन सिर्फ आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्तीयों के भरोसे यह कार्य कार्य सत प्रतिसत सफल हो जायेगा यह कहना अभी कभी मुस्किल सा लगता है। राज्य सरकार को इस कार्यक्रम के लिए स्वंमसेवी संस्थाओं और स्कूल कॉलेजों के माध्यम से भी जनजागरूकता कार्यक्रम को चलना होगा तभी सत प्रतिसत डायरिया से प्रदेश व देश को मुक्ति मिल पायेगी।