दलित हत्या के तीन नामजद आरोपी गिरफ्तार

 नैनबाग टिहरी के जितेंद्र दास को संवर्णो के साथ खाना खाना इतना महंगा पड़ गया कि उसे संवर्णो ने जात-पात के भेदभाव के चलते इतनी बेरहमी से मारा की अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। ये दुःखद खबर सुनते ही हंसते खेलते परिवार में मातम छा गया। परिजन और ग्रामीण देहरादून पहुंचे और पुलिस की कार्रवाई से नाराज़ परिजन मृतक के शव को लेकर मुख्यमंत्री आवास जाना चाह रहे थे लेकिन भारी पुलिस बल ने सबको रोक लिया और कार्रवाई का आश्वासन दिया, आख़िरकार नौ दिन के बाद जब युवक की मौत हो गई तब जाकर पुलिस नामजद तीन आरोपियों को गिरफ़्तार कर पाई है। देखिये क्या था पूरा मामला
मेरा देश बदल रहा है, हम बदल रहे हैं, हम सब एक हैं, लेकिन ये बात झूठी सी लगती है जब एक युवक को सिर्फ इस बात के चलते बेहरहमी से पीटा जाता है कि उसने संवर्णो के साथ खाना खाने की हिम्मत की और वो भी कुर्सी में बैठकर। कमाल है! और ताज्जुब इस बात का, की किसी परिवार का इकलौता कमाने वाला उन लोगों ने मार डाला जो ख़ुद को बड़ी जात का कहते हैं, ये कैसी बड़ी जाट जो किसी के परिवार का चिराग छीन गई!
 परिवार का रो रो कर बुरा हाल है, पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ये ग़रीब परिवार अब बेटे , भाई को वापस तो नही ला सकता लेकिन न्याय की गुहार लगा रहा है, पुलिस ने मौत के बाद तीन लोगों की गिरफ्तारी की है। परिजनों का कहना है कि 7 लोगों के खिलाफ नामजद मुक़दमा दर्ज है लेकिन इतनी बड़ी बात हो जाने के बाद भी अभी आरोपी गिरफ्त से बाहर हैं, पुलिस ने तीन की गिरफ्तारी भी टैब की है जब जान चली गई।
 मौके पर पुलिस अधिकारी और देहरादून एसडीएम भी मामले को देखकर मौजूद रहे पुलिस प्रशासन पर ग्रामीण और परिजनों का आरोप है कि इस मामले पर संवेदनशीलता नही दिखाई गई, जब एक बेक़सूर चला गया तब जाकर विभाग हरकत में आया है। मामले पर एसडीएम की माने तो तीन की गिरफ्तारी हो चुकी है और जो लोग शामिल हैं उस पर कारवाई की जा रही है। लेकिन सवाल लाज़मी है कि आखिर इस मामले पर नौ दिनों तक कोई कारेवाई क्यों नही हुई। क्या प्रशासन मौत के बाद ही जाग पाया।
 मृतक के परिवार वालो का रो रो कर बुरा हाल है हर कोई इंसाफ की गुहार लगा रहा है मृतक की माँ का कहना है खाना खाने शादी में गया था जहा परे वह सवर्णो के साथ कुर्सी पर बैठकर खाना खाने लगा जिसके बाद सवर्ण जाति  के लोगो ने बेटे को पीट पीट कर बुरा हाल कर दिया.
 एक और जहा हम अपने आप को 21वी सदी के कहते है और अपने आप को शिक्षित मानते है लेकिन मानसिकता अभी भी पुराने खयालो की है देश तेजी से आगे बढ़ रहा है लेकिन जब ऐसी घटना सामने आती है तो सवाल यह खड़ा हो जाता है की देश किस और जा रहा है