घने काले बादलों के बीच रोशनी की किरण बन कर आये ये डी एम।

घने काले बादलों के बीच रोशनी की किरण
– नये आईएएस अफसरों से कुछ सीख लें भ्रष्ट आईएएस
– डीएम मंगेश, डीएम पंकज रावत और डीएम डा. अहमद बने मिसाल
देश में अधिकांश आईएसएस अफसरों को राजनेताओं, माफिया और ठेकेदारों के साथ मिलकर कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार के दलदल में शामिल नक्सस का एक हिस्सा माना जाता है। यह आम धारणा है कि रेड कारपेट पर चलने वाले प्रशासनिक अधिकारियों को लाबिंग और लाभ के लिए नेताओं की जी हजूरी में बिछे रहना है।

यह भी आम धारणा है कि आईएएस आफिसर एयर कंडीशनर कमरों में बैठ कर देहात या सीमांत गांव के व्यक्ति के लिए योजनाएं बनाते हैं और उन्हें धरातल की सच्चाई का एहसास नहीं होता है। यह कथन कहीं हद तक सही भी है। लेकिन पिछले 17 वर्षों से लूट-खसोट और भ्रष्टाचार के दलदल में फंसे उत्तराखंड के लिए राहत भरी खबर है। उत्तराखंड के 13 जिलों में तैनात चार-पांच डीएम यानी जिलाधिकारी ऐसे हैं, जिनके सरोकार सीधे तौर पर आम जनता से जुड़े हैं और इन अधिकारियों ने जनता के बीच अपनी छाप छोड़ी है। ऐसे ही अधिकारी हमें लोकतंत्र और व्यवस्था पर विश्वास की उम्मीद जगाते नजर आते हैं। रुद्रप्रयाग के डीएम मंगेश घिल्डियाल युवाओं को पीसीएस और आईएएस के लिए निशुल्क कोचिंग देने और अपनी ईमानदारी के कारण चर्चित हैं तो उनकी पत्नी एक महिला कालेज में निशुल्क कोचिंग दे रही है। इसी तरह से हरिद्वार के डीएम पंकज रावत ने भी अपनी अलग छाप छोड़ी है। वह आम जनता के लिए छोटे-छोटे सरकारी कार्योंलयों में जाते हैं।

वहां आम नागरिक बन जाते हैं और फिर जानते हैं कि समस्या के मूल में क्या है। बागेश्वर की डीएम रंजना भी शिक्षा विशेषकर लड़कियों की शिक्षा को लेकर अभियान चला रही हैं तो चम्पावत के डीएम डा. अहमद इकबाल तो गले में आला डाल रोज जिला अस्पताल में गरीब मरीजों को देखते हैं। वह रोजाना एक घंटे अस्पताल में मरीजों की जांच करते हैं। ऐसे आईएएस हमारी भ्रष्ट और विश्वास खोती प्रशासनिक व्यवस्था में उम्मीद की एक किरण है, जो यह संदेश देती है कि लोकतंत्र इसलिए जिंदा है क्योंकि यहां हर अधिकारी और हर कर्मचारी बिकाऊ नहीं है।