गाय की ऐसी दुर्दशा देखी है कभी आपने?

गाय को हिन्दु धर्म में माता का दर्जा प्राप्त है,क्योंकि उसके दुध को अमृत के समान माना जाता है।बेद और शास्त्रों के अनुसार गाय के शरीर में कई देवी देवताओं का वास है। लेकिन गाय की आज हमारे समाज में कितनी दुर्दसा है यह किसी से छुपी नहीं है। साल में एक बार गोवर्धन पूजा कर हम इतिश्री तो करवा लेते है,लेकिन उसके बाद हम उसकी कोई सुध नहीं लेते है।क्या है पूरी खबर देखते है इस रिपोर्ट में।

गाय की दुर्दशा रोकने के लिए यू तो सरकार ने कई कानून बनाये है।लेकिन फिर भी गाय की स्थिति बद से बदतर होती जा रहीं है।दून की सड़कों पर आवारा गाय आये दिन हादसे का कारण बन रही है। वन विभाग के मुखिया जय राज का कहना है कि हम पशुओं पर अत्यचार की हद पार कर चुके है जब तक गाय दूध देती है तब तक वह माता है और उसके बाद उसे दो चार सौ में बेच देते है।

आवारा गायों के लिए नगर निगम ने कांजी हाउस में व्यवस्था तो की है लेकिन यह व्यवस्था न काफी है यहां पर गायों के लिए न  तो ठीक से रहने की व्यवस्था है और नहीं उनकी परवरिस की किसी को फिकर बस दिन भर बांध कर उनको चारा पानी दिया जाता है वह भी नाम मात्र का समाज सेवी योगेश का कहना है कि नगर निगम द्वारा इन गायों के लिए चरवाहे की व्यवस्था कर कुछ समय के लिए स्वतंत्र कर देना चाहिए।

देहरादून शहर में गाय पालक अक्सर शुबह गाय का दूध निकाल कर उसे आवरा कर देते है ताकि वह मल मूत्र से घर अंगन को खराब न कर सकें, वही देहरादून निवासी लखपत रावत का कहना है कि लोगों ने अब गाय पालना बंद कर दिया है। जिनके पास गाय है भी तो उन्होनें उसे आवारा कर कूडा खाने के लिए मजबूर कर दिया है।

भले ही नगर निगम ब समाज सेवी संस्थायें गाय संरक्षण का ढौंग कर रहे हो लेकिन हकीकत किसी से छुपी नही हैं। शहर में आवारा गायों की संख्या लगातार बड रही है। जिससे आये दिन यातायात भी अवरूध हो रहा है। शासन प्रसाशन को वक्त रहते ठोस काम धरातल पर करने की आवश्यकता है। ताकि गायों की दुर्दशा में सुधार हो सकें।

-भानु प्रकाश नेगी