कोरोना संक्रमण की दहसत में पर्वतीय जिले


भानु प्रकाश नेगी,देहरादून


देश में तेजी से फैल रहें कोरोना संक्रमण को देखते हुए,अब सभी देश वासियों को सजग और सर्तक रहने की आवश्यकता है। क्योंकि हमारे देश में न तो यूरोप और अमेरिका महाद्वीपों जैसी स्वास्थ्य सेवाये है और न ही स्थिति को काबू करने के संसाधन।यूं तो देश के हर राज्य में कोरोना का कहर बढता जा रहा है, लेकिन विकट भौगोलिक परस्थिति वाला प्रदेश उत्तराखंड में जब से प्रवासी लोग वापस अपने गांवों को लौटे है,यहां पर भी कोरोना का ग्राफ तेजी से बढता जा रहा है,जो राज्य सरकार के साथ साथ राज्य वासियों को डरा रहा है।यहां पर यह नही कहा जाना चाहिए कि प्रवासी क्यों आजकल अपने घर वापस आये? निश्चित तौर पर संकट काल में उन्हें अपने घर ही आना चाहिए,लेकिन अव सरकारी नियमों के अनुसार रहने की आवश्यकता है। एक ही दिन में सौ से भी ज्यादा कोरोना पाॅजिटिव केश आना किसी भी हालत में अच्छै संकेत नहीं कहे जा सकते है। अभी तक इन मरीजों में अधिकतर मरीज दिल्ली,मुम्बई,गुजरात, राजस्थान आदि स्थानों से आये प्रवासी है।

लेकिन जिस तरह से बीते दिनों रूद्रप्रयाग के तिलवाडा में मोबाईल का काम करने वाले एक युवक का देहरादून के इन्द्रेश अस्पताल से कोरोना संक्रमित हो जाना और फिर गांव जाकर पता न चलाना चिन्ता मे डाल देने वाला है। यह बात सभी लोग जानते है कि प्रदेश के पर्वतीय जिलों के अस्पताल सिर्फ रेफर संेन्टर है। इन अस्पतालों में कई वक्त बुखार तक की दवा उपलब्ध नही रहती है। तो कोरोना जैसी बीमारी जिसका अभी तक कोई इलाज संभव नही हो पाया है का क्या इलाज होगा? प्रदेश के जिला अस्पतालों मे तक आई सीयू नहीं है,वेन्टीलेटर तो बहुत दूर की बात है। ऐसे मे ंकोरोना जैसी खतरनाक बीमारी से पर्वतीय जिले कैसे लड़ेगे सब राम भरेासे है। भले ही राज्य सरकार अस्पतालों में चाक चैबंद व्यवस्था का दावा कर रही है,लेकिन हाॅलात किसी से छूपे नहीं है। जिला अस्पताल गोपेश्वर में कोरोना मरीजों के साथ साथ सामान्य मरीजों का भी इलाज चल रहा हैं। जो सरकार की व्यवस्थाओ पर प्रश्न चन्हि लगा रहा है। इसी प्रकार प्रदेश लगभग सभी जिला अस्पतालों का यही हाल है।

कोरोना संक्रमण के कारण प्रदेशवासिंयों मे ंभय का माहौल लगातार बड़ता जा रहा हैै।जिस प्रकार से कोरोना पाॅजिटिवों के चौंकाने  वाले मामले सामने आ रहें है। उससे तो यही गलता है कि अब स्थििति आगे और भी खतरनाक होने वाली है। अभी तक सकून इस बात का है कि इस वायरस का संक्रमण सिर्फ बाहर से आये प्रवासिेयों पर अधिक है लेकिन क्वारंटीन संेन्टरों में कई जगह पर जिस तरह से लेाग सोशल मीडिया की धज्जियां उड़ रही है उससे गंावो में भी कोरोना फैलने का भय सता रहा है।कोरोना वायरस से वर्तमान समय में शासन और प्रसाशन को बहुत सख्त नियम कानून लागू करने की आवश्यकता है। साथ ही आम नागरिको को अपनी अपनी जिम्मेदारियां संभालने की आवश्यकता हे तभी कुछ हो सकता है। वरना बर्वादी के मंजर का तांडव होने में देर नहीं लगेगी।