कोरोना को हराना हर एक की जिम्मेदारी

  • भानु प्रकाश नेगी


    ऽ राजनीति छोड़ विपक्ष को राज्य सरकार की हर संभव मंदद करने की आवश्यकता।

    ऽ ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना संक्रमण न फैले इसके लिए सभी लोगों को करना होगा खास प्रयास।

    ऽ सरकारी नियमों का सख्ताई से किया जाना चाहिए पालन।

    ऽ प्रवासी कोरोन्टीन होने में करें ग्रामीणों की मदद।

    ऽ प्रवासियों को समझे अपना।

  • देहरादूनः वर्तमान समय में कोरोना महामारी के कारण पूरे विश्व में हाहाकार मचा हुआ है।वही देश में लगातार कोरोना पाॅजिटिव मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है।बात अगर उत्तराखंड की करी जाय तो यहां प्रवासियों की वापसी के बाद मामले तेजी से बड़ते जा रहे है। समूचा उत्तराखंड ग्रीन जोन से आॅरेन्ज जोन में आ गया है। कोरोना महामारी के कारण लाॅकडाउन के चलते उद्योग धन्धे,भवन निमार्ण,माॅल,होटल,रेस्त्रा,पिच्चर हाॅल समेत धार्मिक अनुष्ठान कार्य ठप्प पडे़ हुये है जिसके कारण प्रवासी अपने अपने घरों को जाने के लिए मजबूर हैं। पिछले दिनों बिहार,उत्तर प्रदेश समेत कई प्रदेशों के मजदूरों ने पैदल ही अपने घर जाने की ठानी तो मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस और सत्ताधारी पार्टी बीजेपी में सियासत तेज हो गई। जिसका परिणाम यह हुआ कि यूपी सरकार को बिना परमिट और पास वाली बसों को निरस्त करना पड़ा।और मजदूर और मजबूर लोगों को कई दिनों तक घर जाने के लिए गाडी न मिलने के कारण दर दर भटकना पड़ा।

    राजनीति से करें परहेज

    कोरोना संक्रमण देश में तेजी से फैल रहा है,लेकिन इस वक्त भी राजनीतिक दल अपनी सियासत को चमकाने में लगे हुऐ है,जिसमें बीजेपी एवं कांग्रेस के साथ साथ तमाम राजनीतिक दल सामिल है।राहत सामाग्री पर अपने पार्टी का चुनाव चिन्ह समेत अपने अपने वर्ग के लोगों में राशन वितरण की खबरें सामने आयी है। कोरोना की इस महामारी में देश जब आपातकाल से गुजर रहा हो वहां पर सियासी दलों द्वारा की जा रही राजनीति किसी भी प्रकार से ठीक नहीं है। इस वक्त सभी राजनीतिक दलों को एक साथ आकर कदम से कदम मिलाकर कोरोना जैसे राक्षस को हराना होगा।एक इंसानियत के नाते भी जब मानव जाति के अस्थित्व पर खतरा मंडरा रहा हो तो उसे निपटना अतियंत जरूरी है। राजनीति तो किसी अन्य सामान्य समय पर भी की जा सकती है।

    मदद के लिए आये सभी दल आगे

    कोरोना संक्रमण के इस संकटकाल में सभी सियासी दलों को मतभेद भुलाकर मानव जाति की सेवा के लिए आगे आना चाहिए। हाॅलाकि कई राजनीतिक दलों ने इस लाॅकडाउन के दौरान जरूरतमंद और गरीब लोगांे की मदद भी की है लेकिन वह भी सियासत करने से बाज नहीं आये अपनी अपनी पाटियों का प्रतीक चिन्ह से सजाकर फोटो सेशन के बाद ही राहत सामाग्री वितरित की गई।जो वर्तमान स्थित को में किसी भी दृष्टीकोण से अच्छी नहीं मानी जायेगी।राजनीतिक दलों को जनता के सहयोग से कोरोना संकट के इस दौर में सच्चे समाजसेवी की भूमिका निभाना चाहिए।

    स्यंमसेवी संस्थाओं ने राजनीतिक दलों को दिखाया आईना

    कोरोना के संकटकाल में कई स्यंमसेवी संस्थाओं ने गरीबों व जरूरतमंदों की मदद कर राजनीतिक दलों को आईना दिखाया है। जहां इन संस्थाओं ने एक एक गरीब व जरूरतमंद को अपना प्रचार किये बिना राहत सामाग्री का वितरण किया है।इन संस्थाओ में द हंस फाउंडेशन,वेस्ट वेरियर,नियो विजन,समेंत दर्जनों संस्थायें प्रमुख रही है जो अभी भी हर एक जरूरत मंद को सहायता पंहुचा रही है।

    सिर्फ सरकार पर निर्भर ना रहें

    कोरोना संक्रमण के दौरान केन्द्र से लेकर राज्य सरकारें हर प्रकार से लोगों को राहत पंहुचाने में लगी हुई है।लेकिन इस संकट की घड़ी में समाज के सक्षम लोगों को हर संभव मदद करनी चाहिए। हाॅलाकि अधिकतर सक्षम लोगों ने मुख्यमंत्री राहत कोष और प्रधानमंत्री राहत कोष में हर संभव मदद देकर अपना फर्ज निभाया। लेकिन इतना करने से ही वर्तमान समय में काम नहीं चलने वाला है संकट के इस समय में देश के हर नागरिक को सियासत छोड़कर तन-मन-धन से आम नागरिकों की सहायता करनी चाहिए। इसके साथ ही जन जगरूकता फैलाना जिसमें मास्क पहनना और एक दूसरे से एक फीट की दूरी बनाये रखना,अपने साथ साथ दूसरो को भी साफ सफाई के लिए जागरूक करना आदि सामिल है।

खुद को कोरंन्टीन करने में सरकार की करें मदद

प्रवासी उत्तराखंडियों के विदेशों से और बाहरी राज्यों से अपने गांव लौटने पर प्रदेश में कोरोना संक्रमितों की संख्या तेजी से बड़ रही है। प्रदेश के कई क्षेत्रों से लगातार शिकायतें आ रही है कि कोरोन्टीन किये गये कुछ लोग ग्राम प्रधान व ग्रामीणों से झगड़ा कर रहे है और जबरदस्ती अपने ही घरों में रह रहे है।ऐसे हाॅलतों में वह अपने साथ-साथ अपने परिवार व ग्रामीणों की जान को भी खतरे में डाल रहे है। कई स्थानों पर सरकारी व्यवस्था न होने से लोग जमकर उत्पात मचा रहे है। लेकिन ऐसा करने से अच्छा तो यह होता की कुछ दिनों के लिए अपने घरों से ही खाने और रहने की व्यवस्था करते बजाय सरकार को कोसने के तो अच्छा रहता।