कोरोना से लड़ेगा कोरोना वायरस

 

एक तरफ पूरी दुनिया मैं कोविड 19 के खौफ मैं है वहीं दूसरी ओर भारतीय वैज्ञानिक कोरोना पैदा करने में लगे हुए हैं भारतीय वैज्ञानिकों का मानना है कि जब तक इस वायरस को बना नहीं दिया जाता तब तक इसका इलाज खोजना मुश्किल है कोरोनावायरस को पैदा करने में हैदराबाद स्थित कोशिकीय एवं आणविक जीव विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक जुटे हुए हैं।
इस प्रयोगशाला में भारी तादाद में कोरोना वायरस पैदा किए जा रहे हैं ताकि विषाणु के जीनोम ढांचे को समझा जा सके। जो कोविड नाम की दवा और टीका तैयार करने में मददगार हो सकता है। सीसीएमबी के निर्देशक राकेश मिश्रा का कहना है कि देश को कोविड19 के टीके तैयार करने में 1 साल का वक्त लग सकता है। चीन लोगों की गतिविधियां कम करने के कारण इसका नियंत्रण में काफी कामयाब हो गया है भारत के लोगों को भी इसका ख्याल रखना चाहिए ।

कोरोना में कुष्ठ रोग की दवा हो सकती है कारगर
वैज्ञानिक एवं अनुसंधान परिषद सी एस आई आर कोविड की चुनौतियों से निपटने के लिए कई तरह के काम में जुटा हुआ है इसी कड़ी में कुष्ठ रोग से उपचार के लिए बनी अपनी दवा माइकोबैक्टेरियम डब्लू को कोरोना के उपचार में मददगार पाया गया है अब इस drug को ड्रग कंट्रोलर जनरल से कोरोना उपचार में इस्तेमाल करने की अनुमति मांगी गई है जिससे कोरोना रोगियों का इस दवा से उपचार किया जा सके।