तेजी से फैल रहे कोरोना संक्रमण का क्या है खास कारण,जाने इस खबर में

-मास्क ही कोरोना वायरस का सुरक्षा कवच

-सोशल डिस्टेसिंग का पालन हर हाल में करना होगा।

10 साल से कम के बच्चों व बुजुर्ग को अधिक सर्तक रहने की आवश्यकता

-बीमारियों से ग्रस्त लोगो को अधिक सजग रहना होगा।


देेहरादून-मार्च 2020 में जब देश में पहला मामला कोरोना का आया और 23 मार्च से जून 2020 तक लाॅकडाउन कर दिया गया था तब यह लग रहा था कि लाॅकडाउन के बाद कोरोना का असर बहुत कम हो जायेगा। लेकिन जैसे जैसे अनलाॅक की प्रक्रिया चालू की गई और प्रवासियों का अपने अपने प्रदेशों के लिए आवागमन हुआ कोरोना के मामले लगातार बढते गयें। और अब यह संख्या 43 लाख तक पंहुच गई है। उत्तराखंड में भी कोरोना संक्रमण के मामले अगस्त माह के मध्य से बहुत तेजी से बढने लगे और रिकवरी रेट में भी काफी गिरावट दर्ज की गई, साथ ही मौतों के आंकडें दिन प्रतिदिन बढते जा रहे है।वर्तमान समय में कोरोना संक्रमण उच्च स्तर पर है उत्तराखंड जैसे छोटे रांज्य में लगभग प्रतिदिन एक हजार से भी अधिक कोरोना संक्रमित मरोजों की संख्या का बड जाना चिन्ता जनक बात हो गई है।

लापरवाही से फैल रहा है ज्यादा कोरोना संक्रमण
उत्तराखंड में प्रतिदिन एक हजार से अधिक लोगों का कोरोना संक्रमित होना वाकिह चिन्ताजनक स्थिति हैं। कोरोना वायरस का संक्रमण अब समाज के बीच फैल चुका है,इसे रोकना नामुकिन सा लग रहा है। लेकिन जिस तेजी से कोरोना वायरस फैल रहा है उसका कारण साफ नजर आ रहा कि आम आदमी को कोरोना वायरस का कोई खैफ नजर नही आ रहा है। घर से बाहर सड़क से लेकर सार्वजनिक स्थानों पर मास्क का प्रयोग न करना और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन न करना आम बात हो गई है। जिससे कोरोना वायरस को फैलने में और गति मिल रही है। मास्क न पहनना और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन न करने वालों में सिर्फ अनपढ और मजदूर लोग ही नही पढे लिखे और उच्च वर्ग के लोेग अधिक है।

सरकारी अस्पताल के बेड फुल,प्रायवेट अस्पतालों में इलाज शुरू
दिन प्रतिदिन बढती कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या के कारण राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों के बेड भर गये है। राज्य सरकार ने स्थिति को खराब देखते हुऐ प्रायवेट अस्पतालों में भी कोरोना मरीजों के इलाज की अनुमति दे दी है। साथ ही 1सितंबर 2020 के आदेश के बाद 10 साल से छोटे बच्चे और बरिष्ठ नागरिकों को होम आइसोलेसन करने के साथ साथ स्वस्थ गर्भवती महिलाओं को भी होम आइसोलेट करने के अनुमति दी गई है।सरकारी अस्पतालों में बेड न होने के कारण माध्यम व गरीब वर्ग के लोगांे को भारी परेसानियों को सामना करना पड़ रहा है क्योंकि प्रायवेट अस्पतालों में कोविड 19 के उपचार के लिए एक दिन का कम से कम 18 हजार रूपया खर्च करना पड रहा है। हाॅलाकि स्वास्थ्य महानिदेशक का कहना है कि कोविड के इलाज मे लिए आयुष्मान कार्ड मान्य है।लेकिन जिन लोगांे के पास आयुष्मान कार्ड नहीं है वह अपना इलाज प्रायवेट अस्पतालांे में नहीं करवा पा रहे है।

उत्तराखंड में गांवों तक कोराना संक्रमण की दस्तक
कोरोना का संक्रमण अब उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों के गांव बाजारों तक भी अपने पैर पसार चुका है। रूद्रप्रयाग जिले के जवाडी गांव में जहां एक ही गांव के 32 लोग कोरोना पाॅजिटिव पाये गये वहीं रूद्रप्रयाग के एक अन्य गांव में एक परिवार के 20 लोग कोरोना पाॅजिटव पाये गये वही,चमोली जिले के पोखरी बाजार में उत्तराखंड ग्रामीण बैंक मैनेजर के कोरोना पाॅजटिव पाये जाने से क्षेत्र में हड़कंप मचा हुआ है।साथ ही गोपेश्वर बाजार में कई व्यापारी कोरोना पाॅजटिव पाये गये है। नारायणबगढ में कई लोग कोरोना पाॅजटिव पाये गये है।इस तरह पूरे प्रदेश भर के गांवो और बाजारों से कोरोना संक्रमित लोंगो का पाया जाना काफी चिन्ताजनक स्थिति है।

शासन प्रसाशन की गतिविधि पड़ी सुस्त
लाॅकडाउन के दौरान जिस मुस्तैदी से पुलिस ने काम किया शायद ही कभी ऐसा देखने को मिला हो। लेकिन अनलाॅक के बाद लगातार पुलिस प्रसाशन फिर पुरानी स्थिति में आ गया है।जिस सख्ताई के साथ लाॅकडाउन में पुलिस ले आम जनता को सोशल डिस्टेसिंग,मास्क पहनने के लिए मजबूर किया वह अब कहीं भी नहीं दिखाई दे रही है। राज्य सरकार द्वारा मास्क न पहनने वालों पर 500 रूपये तक का जुर्माना लगाने की बात हुई थी,लेकिन वर्तमान समय में जिस प्रकार से आम जनता के द्वारा मास्क न पहनने और सोशल डिस्टेसिंग का उलंधन किया जा रहा है उसमें पुलिस कही भी मुस्तैद नहीं दिख रही है। जबकि अब पुलिस व प्रसाशन को ज्यादा सक्त होने की आवश्कता है। अगर स्थिति अभी भी नही सुधरी तो मंजर तांडव मचाने वाला हो सकता है।

जनता को जगरूक होने की आवश्यकता
जब तक आम जनता अपने स्वास्थ्य के प्रति चिन्तित नहीं होगी तब तक समाज में परिवर्तन नहीं हो सकता है।कोरोना जैसी छूआ छूत की बीमारी में समाज के सभी बर्ग के लोगों की जिम्मेदारी ज्यादा बड़ जाती है।जब पूरे देश के लोगों की जान पर बन आई हो। लेकिन आज के समय में हमारे समाज में बहुत सारी विकृतियांे फैल चुकी है।तब समाज से यह उम्मीद करना की सभी लोग एक जुट और एक मुठ होकर समाज मै फैली बीमारियो से लेकर बुराईयों से लड़ेगे बेमानी साबित होगा।लेकिन जिस प्रकार की विपत्ति वर्तमान समय में कोरोना नामक जानलेवा बीमारी के रूप में हमारे देश में फैली हुई है। अगर उसमें हमने एक दूसरे का साथ और सरकार द्वारा जारी गाईड लाइन का पालन नहीं करते है तो स्थिति बहुत भयावह हो सकती है।

सर्तकता ही कोरोना से बचाव का एक मात्र साधन है
विश्व व्यापी बैस्विक बीमारी से बचने का एक मात्र उपाय सर्तकता है। भले ही यह अब समाज में हर जगह फैल गया है।समाज के हर व्यक्ति को यह सुनिश्चित करना होगा है कि घर से बाहर अगर निकले तो मुहंू और नाक को अच्छी तरह से ढककर और भीड़ भाड़ वाली जगह से बचना,सोशल डिस्टेसिंग का पालन करना,हाथों को बार-बार साबुन से धोना,हेड सेनेटराईज करना जरूरी है। अगर आप इन सब चीजों का पालन सख्ती से करते है तो आप कारोना वायरस के संक्रमण से हर हाल में बचे रह सकते है।लेकिन अगर जरा भी लापरवाही की तो आप कोरोना वायरस की चपेट में आ सकते है।

           -भानु प्रकाश नेगी