कांग्रेसी दिग्गजों के बीच वर्चस्व की लड़ाई, लोकसभा की पांच सीटों पर दावेदारी की रोचक जंग

प्रदेश में कांग्रेसी दिग्गजों के बीच वर्चस्व की लड़ाई ने लोकसभा की पांच सीटों पर दावेदारी की जंग को भी रोचक बना दिया है। लोकसभा चुनाव के मौके पर एक बार फिर ये जंग सतह पर आ गई है।
 लोकसभा चुनाव मुहाने पर हैं। जहां सत्ता पक्ष अपनी जड़ें जमाने की पूरी आजमाईश में जुटा हुआ है तो वहीं विपक्ष अपनी ही जड़ों को काटने में तुला हुआ है। उत्तराखंड में कांग्रेस के भीतर गुटबंदी खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। जिसकी बानगी तब देखने को मिली जब पूर्व विधायक गणेश गोदियाल ने अपनी ही वरिष्ठ नेता इंद्रा ह्दयेश के खिलाफ मोर्चा खोला। लेकिन यह पहला मामला नहीं है जब कांग्रेस में अपने ही अपनों के खिलाफ हुए हों। पहले भी प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री के खेमें में कड़ी नाराजगी साफ देखी गई। वहीं नेता प्रतिपक्ष व वरिष्ठ नेता इंद्रा ह्दयेश और हरीश रावत के बीच भी गहमागहमी रही। लेकिन एक बार फिर इंद्रा ह्दयेश और हरीश रावत के खेमें की गहमागहमी थमने का नाम नहीं ले रही है। दो वरिष्ठों के बीच अब दूरी इतनी बढ़ गई है कि दोनों इस दूसरे की सीट पर उठने में इतराज जताने लगे हैं।
बता दें कि हरिद्वार और नैनीताल सीट से हरदा ने चुनाव लड़ने की इच्छा जताई थी लेकिन हरदा के खिलाफ नैनीताल सीट से इंद्रा खेमें से आवाज उठने लगी और हरिद्वार सीट से  निचले स्तर पर संगठन से चुनौती मिली है। हालांकि नेता प्रतिपक्ष ने इस बात से साफ इंकार किया है।खैर अंदरूनी कलह जो भी है लेकिन इस पर बीजेपी अपनी राजनीतिक रोटियां जरूर सेकती हुई नजर आ रही है।
 गौरतलब हो कि कुछ दिन पहले ही कांग्रेस नेता व पूर्व विधायक गणेश गोदियाल की नाराजगी को एपीएन ने बड़ी प्रमुखता से दिखाया था। लेकिन गणेश गोदियाल का यह मोर्चा तो जैसे— तैंसे कांग्रेस ने संभाल दिया लेकिन हरीश और इंद्रा खेमें में मची हलचल थमने का नाम नहीं ले रही है। जिसके कारण प्रभारी को पार्टी के अंदर चल रही गुटबाजी को सुलझाने के लिए राजधानी देहरादून में आना पड़ा।