सीएम रावत को केन्द्रित कर बने गीत “उत्तराखंडी जागी जावा“ पर जंग जारी.

हाल ही मैं दीपक नेगी द्वारा निर्मित “उत्तराखंडी जागी जावा“ गढवाली गीत पर उत्तराखंड से लेकर दुबई तक बहस गर्म हो गई है।सोशल मीडिया पर गरमा गरम बहस का दौर जारी है। कथित गायक पवन सेमवाल द्वारा गाया गया यह गाना उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत को केन्द्र बिन्दु बनाकर गाया है। जिसमें कथित अमर्यादित शब्द “झापू“ कह कर मुख्यमंत्री को पुकारा गया है।सोशल मीडिया,इलैक्ट्रानिक मीडिया,और प्रिन्ट मीडिया पर यह बहस जारी है कि, यह गीत टिहरी खास पट्टी के निवासी और वर्तमान समय में दुबई में रहने वाले कथित समाजसेवी रोशन रतूड़ी ने यह गाना धन देकर गवाया गया है। रोशन रतूडी को दुबई में करीब से जानने वाले लोगो का कहना है कि ये समाजसेवा के नाम पर लोगों के साथ धोखाधडी व पीड़ित लागों के परिवारों के साथ छलावा कर चुके है। और सोशल मीडिया पर अपनी अपना प्रचार कर लोगों को बरगलाते रहते है। जिसका ताजा उदाहरण दुबई से सीधा संवाद पुजारा गांव देवप्रयाग टिहरी गढवाल से स्व. अर्जन सिह बिष्ट के पिता मोर सिंह बिष्ट से अब्दुल सलीम की बातचीत से स्पष्ठ हो रहा है कि रोशन रतूड़ी पीडित लेगों के साथ कितना साजिस और धोखा करता है।

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बहरहाल मंगलवार को हरिद्वार बाईपास रोड निवासी व्यवसायी अनिल कुमार पांण्डे ने एक डीबीडी के साथ तहरीर दी है कि मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के खिलाप प्रदेश और समाज में देष भावना फैलाने और उनकी छवि को धूमिल करने के लिए उन पर तथ्यहीन और और असत्य आरोप लगाये गये है।इससे विभिन्न बर्गो के लोगों के बीच उनकी साख गिराने की कोशिस की गई है। तहरीर को रिसीव कर उच्च अधिकारियों के निर्देश पर जांच के लिए भेजा गया है।तहरीर में 15 लोग नामजद किये गये है।इनमें बीडियो निर्माता दीपक नेगी,गायक पवन सेमवाल,विडियों प्रमोटर रोशन रतूड़ी,शिव प्रसाद सेमवाल,रवि सेमवाल,सतीश उनियाल,राहुल रतुड़ी,त्रिलोक चंद्र,सविता जोशी भट्ट,दीपक रावत,नितेश कुमार,अरूण सेमवाल,अव्वल बिष्ट और उदय सामिल है।


भाजपा और कांग्रेस में गीत को लेकर आरोप प्रत्यारोप जारी
बीरेन्द्र बिष्ट, भाजपा प्रदेश प्रवक्ता का कहना है कि सरकार मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के कुसल नेत्रित्व में राज्य के सवागीर्ण विकास की दिसा में अग्रसर है। मुख्यमंत्री ने जो विकास की शुरवात इस राज्य में की है वह इस राज्य में पहले कभी नही हुई है। जिसमें पलायन आयोग का गठन,लखवाड़ व्यासी परियोजना का शुभारम्भ,इवेस्टर मीटिंग जिसमें 20 हजार करोड़ रूपये से भी अधिक का लक्ष्य रखा गया है प्रमुख है। यह सब योजनाओं से अविज्ञय व्यक्ति को मालूम नही है क्योकि वह उत्तराखंड में नही दिल्ली में रहता है। मुख्यमंत्री को लक्ष्य बनाकर राज्य की छवि को धूमिल करने का प्रयास किया है। देवभूमि में एक दूसरे के सम्मान की परम्परा की भी अवहेलना की है। यह राज्य को शर्मसार करने वाला कुकृत्य है। यह गीत उस समय गया गया है जब देश और विदेश के लोग उत्तराखंड में आने को लालायित है।इसके पीछे निश्चित रूप से बहुत बड़ा सडयत्र है और इसके पीछे उन लागों का हाथ है जो उत्तराखंड का विकास नही देखना चाहते है। तहरीर पर उन्ळोने ने कहा कि कानून दोषियों के खिलाप कार्यवाही करेगा साथ ही पार्टी भी अपने स्तर पर इस मामले में सचेत है


प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष किशोर उपाध्याय का कहना है कि संस्कृति कर्मी,पत्रकारो,साहित्यकारों की अपनी भावनायें होती है,उसमें लेखक और गायक की अपनी भावनायें है।पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी को केन्द्रित कर उन पर सीधा प्रहार किया गया था,पूर्व में निशंक (पूर्व मुख्यमंत्री) के उपर भी गाना गया था, अब सीएम रावत के उपर गया गया तो सरकार पूरी तरह से गीतगाने वाली टीम के पीछे पड गई है।यह अभिव्यक्ति की स्वंन्त्रता पर हमला है जो अच्छी बात नही है। अगर सरकार हमला करेगी तो विपक्ष उसके खिलाप खडा होगा। कलाकरों ने सरकार को आयना दिखाने का काम किया है अगर सरकार इससे सबक लेकर अपनी छवि सुधरती है तो लाभ उन्ही को होगा इसमें विपक्ष की काई साजिस नही है।सरकार ने ढेड साल में उत्तराखंड को लूटने का काम किया है। केन्द्र सरकार साढे चार साल में देश को 70 साल पीछे ले गई है। पहाडों में दूर दराज के गांवों की हालत राज्य बनने से पहले से भी बदतर हो गई है ।


वही दोषियों पर तहरीर देने वाले अनिल कुमार पाण्डे का कहना है कि मुख्यमंत्री को इस तरह के अपमानित करने वाले लोग कभी भी उत्तराखंड के हितेशी नही हो सकते है। मेरे किसी पार्टी से कोई विशेष लगाव नही है। लेकिन एक उत्तराखंडी होने के नाते मैने दोषियों पर कार्यवाही की मांग की तहरीर थाने में दी है ताकि दोषियों को सजा मिल सकें।https://www.facebook.com/khabaruttarakhandwebsite/videos/1898726123765903/?t=20

पूर्व कैविनेट मंत्री और कांग्रेसी नेता राजेन्द्र सिंह भण्डारी का कहना है कि राजनीति में आरोप प्रत्यारोप तो लगते ही रहते है।लेकिन अमर्यादित शब्दावली और सीधी तरह से आरोपित करना राजनीति की स्वस्थ परम्परा नही है।इस तरह कृत्यों से उत्तराखंड राज्य की बदनामी और भाई चारे को ठेस पंहुचता है। झांपू जैसा शब्द कतई मर्यादित भाषा में नही आता है।


“सोशल मीडिया पर यह बहस भी गर्म है कि पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी,रमेश पोखरियाल निशंक पर भी लोक गायक नरेन्द्र सिंह नेगी ने गीत गाये है। अब मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत पर गाना गया गया है तो क्या बडी बात हो गई है। इसमें ज्यादातर बुद्विजीवियों का कहना है कि नेगी दा का गया गाना “नौक्षमी नारण,और “कमीसन की मीट भात“ निश्चित रूप से जन गीत था जनता की आवज थी जिसे लोगां ने खूब सराहा जिससे तत्कालीन सरकारों के तख्ता पलट गयें। लेकिन “उत्तराखंडी जागि जावा“ गीत में कई जगह मुख्यमंत्री पर सीधा प्रहार किया गया है। और झापू जैसा शब्द एक राज्य के मुखिया के लिए किसी भी दिसा से मर्यादित भाषा नही हो सकती है। वही लोगों का कहना है कि कथित समाजसेवी रोशन रतूड़ी एक तरफ फेसबुक लाईव कर यह कहते है कि इस गीत से उनका कोई लेना देना नही है। लेकिन जब उन से कहा गया कि गायक व पूरी टीम पर कानूनी कार्यवाही करने से साफ इनकार कर ंदेते है। इससे यह सक पैदा होता है कि रोशन रतूड़ी इस कार्य में लिप्त है”। बहरहाल तरहरीर के बाद दोषियों की गिरफतारी की कानून प्रक्रिया जारी है,और दोषियों पर कार्यवाही तय मानी जा रही है।

              -भानु प्रकाश नेगी,देहरादून