सुस्त सरकार :”चमकी” बुखार का मासूमों पर कहर जारी।

बिहार और चमकी बुखार का कहर


भानु प्रकाश नेगी


बिहार की बदहाली देशभर में जगजाहिर है।कश्मीर से कन्याकुमारी और अब उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों तक बिहारी ही मजदूरी का काम करते हुये आम तौर पर दिख जाते है।भले ही बिहारी सिर्फ मजदूर नही है प्रसाशनिक सेवा में भी काफी है।बिहार के अधिकतर भाग में बाढ़ के कारण खेती नष्ट हो जाती है ।साथ ही घरों में पानी घुसने से हर साल बड़ी परेसानी रहती है।
आजकल बिहार के मुजफरपुर व अन्य स्थानों में खतरनाक इंसफलाईटिस बुखार ने मासूमों को आपने आगोस में ले लिया है।जिसके कारणअभी तक 170 से अधिक बच्चे अपनी जान गंवा चुके है।इतनी मौतें शासन और प्रसाशन के कुरूप व कसैले चहरे को बेनकाब करने के लिए काफी है कि, यहां की स्वास्थ्य व सफाई व्यवस्था कितनी खराब हालत में है।
गरीबी हटाओ की नारेबाजी से आसमान भेदने की कोशिश करने वाले भूल जाते है कि,देश कि 36 करोड़ आबादी आजादी के 70 साल बाद भी शिक्षा,स्वास्थ,पोषण आदि से बंचित है।जिनमें बिहार उत्तर प्रदेश,मध्य प्रदेश,झारखंड़ शीर्ष पर है, और दुनियां के आधे गरीब इन्हीं राज्यों में है।हालत इतनी खराब है कि मच्छर, मक्खी तक इन्हे काॅल के ग्रास में ले जाने को मजबूर कर देती है है।
पिछले साल की ग्लोबल न्यूट्रेसन रिपोर्ट के अनुसार दुनियां की 24 फीसदी कुपोषित आवादी भारत में रहती है।जिनमें 5 साल तक के 30 फीसदी बच्चे सामिल है।तब समझना आसान है कि इन बच्चों के लिए 21वी सदी सपना है या त्रासदी।
सवाल मीडिया (इलेक्ट्रानिक) की कार्यशैली पर भी उठे है , बात चाहे खबर को सनसनी खेज तरीके से पेस करने का हो या डाॅक्टरों के उपचार करने में बाधित करने का या आई सीयू में अनावश्यक तरीके से घुसने और हद तब पार कर गये जहब मृत बच्चे के कफन को हटाकर दिखाने की कोशिस की गई।टीआरपी के लिए कई बार खबरिया चैनल मानवीय संवेदनायें भी भूलते जा रहे है।साथ ही खबरों को आक्रमक अंदाज में पेस कर भय फैलाना भी किसी अपराध से कम नहीं आंका जा सकता है।सत्ता के गलियारों में बैठे हुक्मरानों को उनकी जिम्मेदारी का अहसास दिलाने के बजाय अनावश्यक चीजों को दिखाना किस प्रकार की पत्रकारिता है?
बिहार में जनता दल यू और बीजेपी की संयुक्त सरकार ने इस विकट घड़ी में भी संजीदगी का परिचय नहीं दिया, जो वेहद अमानवीय कहा जायेगा। नेतागीरी की संजीदगी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि एक नेता बयान देता है कि बच्चों की मौत के लिए लीची जिम्मेदार है, वही दूसरा नेता पत्रकार वार्ता में भारत पाकिस्तान मैच का स्कोर पूछता है ।
मुजफ्फरपुर गंदगी के 387 वे पायदान पर है।और आजकल पारा 45 को पार कर रहा है। तब बीमारी होना लाजमी है।लू के कारण 200 से अधिक लोगों की मौत सोचने को मजबूर कर देता है।
बाल रोग विशेषज्ञ डाॅक्टरों का कहना है कि, यह बीमारी कुपोषित बच्चों में होती है जिसमें खून में ग्लकोज का स्तर बेहद कम स्तर पर पंहुचने के कारण दिमाग पर असर होने के कारण होती है,इसका असर कम उम्र के बच्चों में अधिक देखने को मिलता है।
दो वर्ष पूर्व उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में भी इसी तरह का कहर बच्चों में देखने को मिला था लेकिन योगी सरकार इससे निपटने में सफल रही है ।लेकिन बिहार में अभी तक सियासत बाकी है।मुख्य बिपक्षी दल के नेता तेजस्वी यादव हार के बाद लापता है जो बिहार की कायाकल्प की बात कर रहे थे। वहीं मुख्यमंत्री नीतिश कुमार व उप मुख्यमंत्री भी मौन हैं।जबकि पक्ष विपक्ष
पक्ष को इस संकट की घड़ी में दलगत राजनीति के दलदल से अपर उठकर निपटना चाहिए था।लेकिन किसी का क्या जाता है? दर्द का अहसास तब होता जब इनका अपना बच्चा भी इसी बीमारी से दम तोड़ता।
सच ही कहा गया है कि, नेता इस देश से गरीबी नहीं गरीबों को मिटाने के लिए आतुर है।