चीड़ के जंगल कैसे बन सकते है अभिषाप से बरदान जाने इस खास खबर में।

उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में चीड़ के जंगलों में हर साल फायर सीजन में आग लगने से करोड़ों रूपये की वन संम्पदा,जंगली जानवरों व जन की हानि होती है।क्योंकि चीड़ की पत्ती में पैट्रों पदार्थ काफी मात्रा में पाये जाते है, जिसके कारण अति ज्वलनशील पदार्थो की श्रेणी में आता है।जंगलों में आग लगने का 90 प्रतिसत से अधिक कारण चीड़ की पत्तियों होती है।

गोविन्द बल्वभ पंत कृर्षि विश्वविद्यालय के शोध छात्र-छात्राओं द्वारा तैयार इस तकनीकी का उपयोग कर चीड़ के जंगलों को अभिषाप से वरदान में बदला जा सकता है।